चैती छठ पूजा: नहाय खाय के साथ आज से चैती छठ पूजा की हुई शुरुआत, गूंजने लगे शारदा सिन्हा के छठ गीत

Spread the love

 

चैत्र नवरात्र पर देवी दुर्गा की पूजा और रामनवमी को लेकर चल रही तैयारियों के बीच चैती छठ आज से शुरू हो गया है। चार दिवसीय महापर्व छठ का आज पहला दिन है। आज नहाय खाय है। पिछले साल कार्तिक छठ, यानी डाला छठ के समय ही लोक गायिका शारदा सिन्हा का निधन हुआ था। चैती छठ पर भी शारदा सिन्हा के गीत गूंज रहे हैं। पटना के घाट पर…, करिहा क्षमा छठी मईया… जैसे गीतों की गूंज पटना समेत बिहार के हर हिस्से में सुनाई दे रही है। कार्तिक महीने का छठ जिस तरह लगभग हर बिहारी घरों में होता है, उस तरह चैती छठ नहीं होता है; इसके बावजूद ज्यादातर लोग लोक आस्था के इस महापर्व पर चैत्र महीने में भी पूजन स्थलों पर जाते हैं। चैती छठ को मान्यता और मनोकामना का पर्व समझा जाता है। आम धारणा है कि जिनकी मनोकामना पूरी हो जाती है, वही चैती छठ करते हैं।

सभी मान्यताएं कार्तिक छठ जैसी, ऋतुफल का महत्व
लोक आस्था के महापर्व छठ की जो भी बातें कार्तिक मास के मुख्य छठ पर्व पर होती हैं, वही चैती छठ में भी लागू हैं। मंगलवार को नहाय खाय है। लोग सुबह से ही गंगा नदी के तट पर पहुंच रहे हैं। जहां गंगा नहीं, वहां गंगाजल से नहाकर व्रती आज बाकी काम करेंगे। चैती छठ को लेकर मान्यता है कि सुख-समृद्धि को लेकर मनोकामना पूरी होने पर मन्नत के अनुसार एक, तीन या पांच साल तक यह व्रत करते हैं या फिर मनोकामना पूरी होने तक। चैती छठ कार्तिक छठ की तरह अमूमन पोखर पर नहीं किया जाता है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के इक्का-दुक्का घाटों पर यह छठ होता है। ज्यादातर लोग घरों में ही करते हैं। कार्तिक महीने में मिलने वाले कई फल चैती माह में नहीं मिलते हैं, इसलिए ऋतुफल का इंतजाम किया जाता है।

कल होगा खरना, शुक्रवार को अंतिम अर्घ्य देंगे
कार्तिक छठ की तरह ही चैती छठ का व्रत भी आम तौर पर महिलाएं ही करती हैं। इस बार लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व चैती छठ एक अप्रैल से शुरू हुआ है। सोमवार को नहाय-खाय से इसकी शुरुआत हो रही है। व्रती स्नान-ध्यान कर नया वस्त्र धारण कर पर्व के लिए गेहूं धोकर सुखाएंगी। गर्मी खूब है, इसलिए आज इसमें ज्यादा समय नहीं लगेगा। गेहूं सुखाने में भी काफी निष्ठा रखनी पड़ती है। इसके बाद व्रती भोजन में अरवा चावल का भात और कद्दू की सब्जी बनाती हैं और खुद के साथ पूरे परिवार को नहाकर ही खाने के लिए कहा जाता है। दो अप्रैल मंगलवार को खरना होगा। इस दिन व्रती दिनभर उपवास रखेंगी। शाम में खीर और सोहारी का प्रसाद मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी के जलावन से बनाया जाएगा। प्रसाद बन जाने के बाद व्रती एक बार फिर स्नान-ध्यान कर रात में छठी मईया को प्रसाद का भोग अर्पित करती हैं। भोग लगाने के बाद व्रती इसी प्रसाद को ग्रहण करेंगी और फिर शुरू हो जाएगा 36 घंटे का निर्जला अनुष्ठान। गुरुवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जागा और शुक्रवार को उदीयमान सूर्य को जल अर्पित कर महापर्व का समापन होगा।

Spread the love
और पढ़े  बिहार-  मंत्रिमंडल का हुआ विस्‍तार,बिहार सरकार में 32 विधायकों ने ली मंत्री पद की शपथ, जानिए कौन-कौन से नाम शामिल
  • Related Posts

    Bihar- न विधायक और न ही विधान परिषद, फिर भी वैशाली के लाल ने ली मंत्री पद की शपथ

    Spread the love

    Spread the loveदीपक प्रकाश एक बार फिर अपने अलग अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। बिहार की राजनीति में यह पहला मौका नहीं है जब उनके पहनावे को लेकर बहस छिड़ी…


    Spread the love

    बिहार-  मंत्रिमंडल का हुआ विस्‍तार,बिहार सरकार में 32 विधायकों ने ली मंत्री पद की शपथ, जानिए कौन-कौन से नाम शामिल

    Spread the love

    Spread the loveबिहार में आज सम्राट चौधरी कैबिनेट का विस्तार हो गया। राजधानी पटना के गांधी मैदान में मंत्रिमंडल विस्तार समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री…


    Spread the love