सरकारी दफ्तरों में स्वच्छता अभियान से केंद्र ने 5 साल में कमा डाले 4100 करोड़ रुपये, जानें कैसे..

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केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने रविवार को बताया कि सरकार ने केंद्र सरकार से जुड़े अलग-अलग कार्यालयों से कबाड़ की स्क्रैप में नीलामी कर पांच साल में करीब 4100 करोड़ रुपये की कमाई कर डाली। जिन चीजों को कबाड़ में नीलाम किया गया, उनमें रद्दी के साथ इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं भी शामिल रहीं। बताया गया है कि यह पूरा अभियान केंद्र सरकार की स्वच्छता मुहिम का हिस्सा रहा।

जितेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले साल के विशेष स्वच्छता अभियान 4.0 के अंत तक लगभग 3,300 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी, जिसके साथ इस वर्ष के विशेष स्वच्छता अभियान 5.0 (दो से 31 अक्तूबर 2025 तक) से 788.53 करोड़ रुपये और जोड़े गए। इस प्रकार अब तक कुल आय 4,088.53 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है।

 

उन्होंने कहा, “2021 से अब तक पांच वार्षिक विशेष स्वच्छता अभियानों के जरिए (जो हर साल एक महीने चलाए गए)  अलग-अलग केंद्रीय सरकारी कार्यालयों में जमा कबाड़ की नीलामी से कुल 4,088.53 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।” सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले स्वतंत्रता दिवस संबोधन में लाल किले से स्वच्छता अभियान का आह्वान किया था। इस पहल ने एक जन आंदोलन का रूप लिया, जिसकी बदौलत पहले वर्ष में ही चार लाख से अधिक शौचालय बनाए गए।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एक अभियान के रूप में सरकारी कार्यालयों से पुरानी फाइलें, टूटे फर्नीचर और अन्य बेकार वस्तुएं हटाने का काम शुरू किया गया। सिंह ने बताया कि हर वर्ष इस अभियान में नए आयाम जोड़े गए। 2021 में प्रधानमंत्री के सुझाव पर निर्णय लिया गया कि स्वच्छता आंदोलन जारी रहेगा, परंतु हर वर्ष 2 अक्तूबर (गांधी जयंती) से 31 अक्तूबर तक विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा, जिसमें सभी मंत्रालयों और विभागों को सक्रिय रूप से भाग लेना होगा और प्रगति की रिपोर्ट देनी होगी।

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मंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में पारंपरिक कबाड़ के साथ-साथ दफ्तरों में काफी इलेक्ट्रॉनिक कबाड़ भी एकत्र हुआ, जिसे न केवल राजस्व जुटाने के लिए बेचा जा सकता है, बल्कि पुनर्चक्रण के जरिए वेस्ट टू वेल्थ मॉडल के तहत उपयोगी बनाया जा सकता है। अभियान का एक अन्य प्रमुख नतीजा यह रहा कि 2.31 करोड़ वर्ग फीट क्षेत्र को उपयोग योग्य बनाया गया, जो पहले अनुपयोगी वस्तुओं, पुराने फर्नीचर और कबाड़ से भरा था।

सिंह ने कहा कि कबाड़ से अर्जित 4,088 करोड़ रुपये का राजस्व किसी बड़े अंतरिक्ष अभियान या कई चंद्रयान अभियानों के बजट के बराबर है। उन्होंने कहा कि मुक्त हुआ क्षेत्र इतना बड़ा है कि उसमें एक विशाल मॉल या अन्य आर्थिक ढांचे का निर्माण किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष का विशेष स्वच्छता अभियान 5.0 उस समय चलाया गया जब विज्ञान-प्रौद्योगिकी मंत्रालय बड़े पैमाने पर वेस्ट टू वेल्थ गतिविधियां भी चला रहा था। इसमें सीएसआईआर-एनआईआईएसटी तिरुवनंतपुरम की ओर से विकसित और एम्स नई दिल्ली में लागू अस्पताल अपशिष्ट पुनर्चक्रण तकनीक, सीएसआईआर-आईआईपी देहरादून द्वारा किए जा रहे पका तेल पुनर्चक्रण और सीएसआईआर-सीआरआरआई नई दिल्ली की तरफ से विकसित प्रौद्योगिकी से इस्पात स्लज का सड़क निर्माण में उपयोग शामिल है।

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