कैग रिपोर्ट- उत्तराखंड में 100 दिन के रोजगार की गारंटी, 6.54 लाख परिवारों को मिला 21 दिन का काम

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत ग्रामीण परिवारों के लिए साल में 100 दिन के रोजगार की गारंटी है, लेकिन अप्रैल 2019 से मार्च 2024 के बीच औसतन साल में 6.54 लाख परिवारों को 21 दिन का काम मिला। कैग की रिपोर्ट से इसका खुलासा हुआ है।

कैग की रिपोर्ट के मुताबिक मनरेगा एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को साल में 100 दिन की मजदूरी रोजगार की गांरटी देकर उनकी आजीविका सुरक्षा को बढ़ाना है। उत्तराखंड में जहां 66 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। यह योजना गरीबी उन्मूलन एवं ग्रामीण विकास के लिए अहम है। खासकर उन पर्वतीय जिलों के लिए जो भौगोलिक और आर्थिक विषमताओं से प्रभावित हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल 2019 से मार्च 2024 के दौरान राज्य की ओर से उपलब्ध 3647.21 करोड़ की धनराशि में से 3638.95 करोड़ की धनराशि का उपयोग किया गया। इससे 27.04 लाख परिवारों को मजदूरी रोजगार प्रदान किया गया। 2340.06 करोड़ के मजदूरी भुगतान के साथ 11.56 करोड़ मानव दिवस सृजित किए गए।

 

वित्तीय प्रबंधन में मिली कमी
कैग रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में मनरेगा के वित्तीय प्रबंधन एवं क्रियान्वयन में कमी मिली है। रोजगार गारंटी निधि को देरी से अवमुक्त करने की वजह से 2.03 करोड़ की ब्याज देनदारी एवं सामग्री मदों में 122.40 करोड़ की लंबित देयता हो गई है।

पात्र परिवारों की पहचान के लिए घर-घर नहीं किया गया सर्वे
कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि योजना के तहत दिशा निर्देश के बाद भी पात्र परिवारों की पहचान के लिए घर-घर सर्वे नहीं किया गया। चयनित ग्राम पंचायतों में से किसी ने भी 2019 से 2024 तक इसके लिए सर्वे नहीं किया।

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39 प्रतिशत जॉब कार्ड बिना फोटो के
कैंग रिपोर्ट के मुताबिक मनरेगा के तहत जॉब कार्ड अहम दस्तावेज है। जो श्रमिकों की पात्रता को दर्ज करता है,लेकिन जांच में पाया गया कि 39 प्रतिशत जॉब कार्ड बिना फोटो के थे।

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