उत्तरकाशी: जिला पंचायत की बोर्ड बैठक, 27 करोड़ के प्रस्ताव पास, मानसून सीजन के लिए चिंतित दिखे सदस्य

देहरादून जिला पंचायत की चौथी बोर्ड बैठक बुधवार को अध्यक्ष सुखविंदर कौर की अध्यक्षता में हुई। बैठक में सभी सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों की बात सदन में रखी। इस दौरान करीब 27 करोड़ रुपये के निर्माण कार्यों को सर्वसम्मति से पास किया गया।

बैठक में आने वाले मानसून सीजन के लिए सभी सदस्य चिंतित नजर आए और उनसे इससे निपटने की कार्ययोजना के बारे में जाना। शांतिपूर्ण तरीके यह बैठक करीब पांच घंटे चली। बैठक के दौरान क्षेत्रों में विभिन्न विकास कार्यों को स्वीकृति दी गई। नाली निर्माण, सड़क-खडंजा, पंचायत की आय बढ़ाने संबंधित मुद्दों पर बात रखी। सबसे पहले विभागवार चर्चा हुई। सदस्यों ने अपने-अपने सवाल अधिकारियों से पूछे। बैठक के अंत में करीब जिला पंचायत की ओर से प्रस्तावित करीब 27 करोड़ रुपये के निर्माण कार्यों के प्रस्ताव पास किए गए।

 

इनमें 16वें वित्त के अंतर्गत योजनाओं के निर्माण की अनुमति ली गई और सात करोड़ रुपये के विभिन्न प्रस्ताव रखे गए। इसके साथ ही छठे वित्त आयोग के तहत करीब 20 करोड़ रुपये से कराए जाने वाले निर्माण कार्य सदन के समक्ष रखे गए। इनमें सड़क, संपर्क मार्ग, बरातघर, विभिन्न जगहों पर टिनशेड आदि निर्माण के प्रस्ताव शामिल रहे।

सुखविंदर कौर ने सभी प्रस्तावों को जनहित में पास कर दिया। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी सहित अन्य अधिकारी और सदस्य मौजूद रहे। 

एसडीएम कालसी के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास
एक जिला पंचायत सदस्य आरा दीवान सिंह तोमर ने सदन के सामने अपनी पीड़ा रखी। कहा कि मैंने एसडीएम कालसी को एक मामले में कॉल की थी लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। मंगलवार को वह एसडीएम कार्यालय में पहुंच गए। करीब ढाई घंटे तक वह एसडीएम से मिलने के लिए बैठे रहे लेकिन एसडीएम ने उनको सूचना होने के बावजूद अंदर नहीं बुलाया। दीवान सिंह ने सदन को अवगत कराया कि जब एक जनप्रतिनिधि को एसडीएम से मिलने के लिए ढाई-तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ता है तो आम आदमी के पहुंच से अधिकारी कितनी दूर हैं। इस पर सदन ने एकमत से इस घटना के विरोध में एसडीएम कालसी के विरोध में निंदा प्रस्ताव पास किया।

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सदन में नहीं पहुंचे अधिकारी तो अभिषेक हुए नाराज
बोर्ड बैठक की शुरुआत लोनिवि से हुई। सदस्यों ने जब सवाल पूछना शुरू किया तो उस समय तक बैठक में लोनिवि के चार खंड के अधिशासी अभियंता नहीं पहुंचे थे। इस पर सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। जिला पंचायत उपाध्यक्ष अभिषेक सिंह ने भी इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अधिकारियों को सदन की गरिमा का ख्याल नहीं है। जब अधिकारी ही नहीं हैं तो जनप्रतिनिधि क्या सवाल पूछे। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि अनुपस्थित अधिकारियों का एक महीने का वेतन काटा जाए। सर्वसम्मति से इसे पास कर दिया गया। हालांकि बाद में अनुपस्थित अधिकारी बैठक में पहुंच गए। इसके बाद वेतन रोकने के प्रस्ताव को बदलते हुए भविष्य में बोर्ड बैठक की गरिमा का ध्यान न रखने पर कड़ी चेतावनी दी गई।

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