Bihar: भूखंड देने वाली आवास योजना का ‘तिलस्मी’ खेल, इधर प्लॉट स्कीम बंद करने का आदेश, उधर लेते रहे आवेदन

पूरे एक महीने इंतजार के बाद यह खबर प्रकाशित की जा रही है। फरवरी के पहले दिन से इस खबर पर काम हो रहा था। अंतिम में 9 फरवरी को जिम्मेदारों से बात की गई। सुधार का मौका मांगा गया। फिर भी खेल चलता रहा। सुधार तो वह दो-तीन दिनों में हो सकता था, लेकिन कभी बिहार विधानमंडल सत्र तो कभी त्योहार का बहाना। लेकिन, अब यह सब बहाने खत्म। इसलिए, अब बिहार राज्य आवास बोर्ड में चल रहे खेल का खुलासा।

 

गुपचुप स्कीम, स्थगन आदेश के बावजूद लिया ऑनलाइन आवेदन
बिहार राज्य आवास बोर्ड कारनामों की जगह है। एक से बढ़कर एक कारनामे हो रहे हैं। बानगी है यह खबर, जिसकी ‘जानकारी’ तो ‘जानकारों’ को भी नहीं है। आवास या आवासीय भूखंड के लिए तरसने वाले जिन लोगों की नजर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना अथॉरिटी या दिल्ली विकास प्राधिकरण की हाउसिंग स्कीम तक पहुंच जाती है; ऐसे लोगों को भी बिहार राज्य आवास बोर्ड की ऐसी किसी योजना की जानकारी नहीं थी, जो शुरू हुई और अब ‘कथित तौर पर’ बंद भी हो चुकी है। आवास बोर्ड की एक वेबसाइट (पोर्टल) पर इस योजना के बंद होने की घोषणा की गई। बाकायदा पत्र जारी किया गया। वहीं, वास्तव में जिस दूसरी वेबसाइट से इस योजना के लिए आवेदन लिए जा रहे थे, उसपर उस स्थगन सूचना के बाद भी ऑनलाइन आवेदन होता रहा। 

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नीतीश कुमार, प्रेम कुमार… ऐसे नाम से 8 आवेदन
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार या विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने आवेदन किया हो, यह शायद संभव नहीं। उन्हें इसकी जरूरत नहीं होगी। लेकिन, कुल आठ लोगों के नाम से आवेदन होने की जानकारी ‘अमर उजाला’ के पास है। यह आवेदन 19 फरवरी को हुए, जिस दिन ऑनलाइन फॉर्म भरने की अंतिम तारीख थी। यह आवेदन राजीव रंजन झा, नीतीश कुमार, प्रेम कुमार, अनिल कुमार रमण, विक्रम कुमार, आदित्य राज, तान्या रॉय, इंद्रजीत कुमार के नाम से दर्ज हुए। 18 फरवरी को भी आवेदन हुए और 19 फरवरी को भी। संभव है कि इन आवेदकों को इस योजना की जानकारी हो, लेकिन बंद होने की नहीं। हालांकि दूसरी आशंका भी है कि साजिश के तहत यह आवेदन कराए गए हों। वैसे, अगर पहली वाली बात ही मान लें तो इन आवेदनों से आई राशि का क्या होगा, यह कोई नहीं बता सकेगा फिलहाल। क्योंकि, आवास बोर्ड ही कहेगा कि आवेदन बंद होने की सूचना के बाद ऑनलाइन फॉर्म नहीं भरना चाहिए था। ऐसी दलीलें (इसे दूसरी खबर में सामने लाएंगे) पहले भी सामने आती रही हैं।

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