Bihar: पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पटना पुलिस को बताया ‘झूठा’,NEET की छात्रा के साथ क्या नहीं हुआ

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बिहार पुलिस बुरी तरह बेइज्जत हो गई है। किसी लड़की की इज्जत छीनने और उसे मौत तक पहुंचाने वालों को बचाने की उसकी कोशिश साफ-साफ सामने आ गई। पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक ने जिस मामले को सुसाइड करार देने का बाकायदा बयान जारी किया था, अब उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आ गई है। इस रिपोर्ट में यूं तो एक लाइन से बताया जा रहा है कि इसमें दुष्कर्म से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन पूरी रिपोर्ट यह साफ-साफ बता रही है कि उसके विभिन्न अंगों पर दुष्कर्म का प्रमाण है। पटना पुलिस जहानाबाद निवासी छात्रा के मामले में उसी तरह कर रही थी, जैसे समस्तीपुर निवासी दो बच्चों की मौत को ‘सामान्य’ बताकर शांत कर दिया था।

 

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पलट दी पटना पुलिस की थ्योरी 
गर्ल्स हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पटना पुलिस के दावे को ही पलट दिया। घटना के बाद से ही पटना पुलिस इसे आत्महत्या बताकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खाकी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार छात्रा के साथ वह हुआ जिसका आरोप मृतका के परिजन लगा रहे थे। रिपोर्ट में छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न की बात सामने आई है, जिसके साक्ष्य छात्रा के शरीर पर मिले।पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने अब उन आरोपों की पुष्टि कर दी है।

जांच अधिकारी अब केस वापस लेने का बना रहे दवाब
पटना पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने से पहले छात्रा की मौत को आत्महत्या करने का दावा किया था। कारण के रूप में नींद की गोलियों का ओवरडोज बताया, जिसे डॉक्टरों के रिपोर्ट ने एक सिरे से खारिज कर दिया है। परिजनों का आरोप है कि अब जब रिपोर्ट आया तो जांच अधिकारी अब केस वापस लेने का दवाब बना रहे हैं।

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राजनीति हुई शुरू 
अब इस मामले पर सियासत भी शुरू हो गई। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर शुक्रवार को छात्रा के घर जहानाबाद पहुंचे और शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल उठाए और मामले में नए सिरे से निष्पक्ष जांच की मांग की। इस दौरान उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि यौन उत्पीड़न की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। इसके बावजूद प्रशासन का रवैया ढुलमुल बना हुआ है। अब इस मामले की गहन और स्वतंत्र जांच अनिवार्य है ताकि सच्चाई सामने आ सके। प्रशांत किशोर ने कहा कि यह सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि बिहार की गिरती कानून व्यवस्था का प्रमाण है। जब तक बच्ची को न्याय नहीं मिलता, जन सुराज शांत नहीं बैठेगा।

सरकार की खामोशी और महिला आयोग की चुप्पी क्यों?
वहीं भाकपा माले की नेता ने सरकार और महिला आयोग पर हमला किया है। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मां को गाली देने का प्रकरण सामने आया तब पीएम मोदी से लेकर महिला आयोग तक उठ खड़ी हुई लेकिन अभी छात्रा के साथ गंदा कार्य हुआ तो महिला आयोग खामोश है। आखिर सरकार कुछ बोल क्यों नहीं रही है? उन्होंने पटना पुलिस पर हमला करते हुए कहा कि पुलिस असली कारण किसके इशारे पर दबाने की कोशिश कर रही थी, इसका उजागर होना भी जरुरी है।

प्रशांत किशोर की यह है मांग 
इस मामले पर प्रशांत किशोर ने तंज कसा है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी पूरी तरह से पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस मामले को रफा-दफा करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने मांग की कि मामले की जांच के लिए विशेष टीम का गठन हो। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के तथ्यों के आधार पर नई धाराओं में एफआईआर दर्ज की जाए। दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर स्पीडी ट्रायल चलाया जाए।

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पुलिस के मनमानी की दूसरी कहानी 
बात 15 अगस्त 2025 की है। पाटलिपुत्रा थाना क्षेत्र के पटेल नगर रोड नंबर 12 अंतर्गत गोकुलपथ में एक कार के अंदर दो बच्चों का शव मिला था, जिसकी पहचान गणेश साव की पुत्री लक्ष्मी (7) और पुत्र दीपक (5) के रूप में की गई। बच्चों के पिता गणेश साव मजदूरी करते थे और मां दूसरे के घरों में झाड़ू पोछा करती थी। परिजनों के अनुसार उसे महिला शिक्षिका ममता ने होम ट्यूशन पढ़ाने के लिए लगभग 12 बजे अपने घर बुलाई थी। काफी देर तक घर वापस नहीं लौटने पर उनकी खोजबीन शुरू हो गई। खोजबीन के दौरान शाम लगभग 4 बजे एक खाली प्लॉट में उत्तराखंड के नैनीताल आरटीओ रजिस्टर्ड एक कार के अंदर पिछली सीट पर दोनों भाई-बहन के शव मिले। शव मिलने की जानकारी मिलते ही लोगों ने घटना की सूचना स्थानीय पुलिस को दी। स्थानीय लोगों का कहना था कि दोनों शव को देखने के बाद ऐसा प्रतीत होता है कि दोनों भाई-बहन की हत्या कर के शव को गाड़ी में रखा गया है।

शव को खपाने की थी तैयारी 
घटना के संबंध में मां किरण देवी ने आरोप लगाते हुए कहा कि शव को देखने से ऐसा लगता है कि महिला शिक्षिका ने ही बच्चों को गर्म पानी या इलेक्ट्रिक से जलाकर मारा है। बेटे के शरीर पर चोट के निशान हैं, जबकि बेटी को जहर जैसा कुछ चीज जबरदस्ती पिलाकर उसका गला घोंटा गया है। उनका आरोप है कि दोनों की हत्या के बाद शव को खपाने की तैयारी थी, जो नाकाम हो गई और मामला खुल गया।

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थानेदार ने तीन हजार रुपया देकर जबरन हाजीपुर तक पहुंचाया 
आननफानन में दोनों बच्चों का देर रात में पोस्टमोर्टम कराया गया और सुबह एक बजे एंबुलेंस से जबरदस्ती उन्हें लाश के साथ समस्तीपुर भेज दिया गया। मां किरण देवी ने थानाध्यक्ष विशाल कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा कि थानेदार ने मुझे तीन हजार रुपया दिया और जबरन समस्तीपुर जाने के लिए बाध्य किया। मां किरण देवी ने तो यहां तक कहा कि थानाध्यक्ष विशाल उस दिन इनको हाजीपुर तक छोड़कर आया ताकि वह इस बात को पक्का समझ ले कि उसने पटना में होने वाले हंगामो को समस्तीपुर भेजने में सफल हो गया। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने मामले को रफा-दफा करने के लिए उन्हें समस्तीपुर जाने का दवाब बनाया। इसके पीछे पुलिस के दो लॉजिक थे। पहला दिन दहाड़े हुए इस  डबल मर्डर मामले को शांत किया जा सके और दूसरा आरोपी को बचाया जा सके।

न्याय मांगने पर लाठियां मिली
परिजन बच्चों का अंतिम संस्कार कर वापस पटना लौटे और तो फिर अटल पथ पर प्रदर्शन किया। उनकी मांग थी कि बच्चों के हत्यारे को सजा मिले, लेकिन अफ़सोस उनको तो न्याय नहीं मिला लेकिन पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लाठियां जरुर भांजी। कई लोगों को रात के अँधेरे में पकड़ कर थाना ले गई और फिर उनके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की।


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