देहरादून – वन दरोगा भर्ती में बड़ी राहत, जंगलों की सीमा पर भी होगा शहद उत्पादन, पढ़ें अन्य फैसले…

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70 प्रतिशत वनों से आच्छादित प्रदेश में धामी सरकार ने युवाओं को भर्तियों और स्वरोजगार में बड़ी सौगात दी है। कैबिनेट ने वन दरोगा, वन आरक्षी भर्ती की आयु सीमा में राहत देने के साथ ही जंगलों की सीमा पर शहद उत्पादन की नीति मंजूरी दे दी है। इसके अलावा प्रदेश के 452 मदरसों को मान्यता के मामले में भी सरकार ने बड़ी राहत देते हुए अध्यादेश लाने का फैसला लिया है।

बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई। सचिव मुख्यमंत्री शैलेश बगौली ने बताया कि कुल 17 प्रस्तावों को मंजूरी मिली। कैबिनेट ने वन विभाग की उत्तराखंड अधीनस्थ वन सेवा नियमावली 2016 के संशोधन पर मुहर लगा दी। इससे वन दरोगा बनने के लिए अब शैक्षिक अर्हता को 12वीं से बढ़ाकर स्नातक करने के साथ ही आयु सीमा 21 वर्ष से बढ़ाकर 35 वर्ष हो जाएगी। वहीं, वन आरक्षी के लिए आयु सीमा 18 वर्ष से अधिकतम 25 वर्ष हो जाएगी। इस संबंध में कार्मिक विभाग की पूर्व में पारित वर्दीधारी नियमावली के अनुबंध भी लागू रहेंगे।

 

कैबिनेट ने उत्तराखंड वन सीमांत मौनपालन मधुमक्खी आधारित आजीविका एवं मानव हाथी संघर्ष न्यूनीकरण नीति 2026 को मंजूरी दी। इसके तहत लोगों की आर्थिकी में वृद्धि करने, स्वरोजगार को बढ़ावा देने, मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए वन क्षेत्रों की सीमा में मौनपालन की संभावना जताई गई। लिहाजा, जंगल के सीमावर्ती क्षेत्रों में लोग मौन पालन कर सकेंगे।

452 मदरसों को बड़ी राहत, कानून में बदलाव होगा
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम 2025 के तहत सरकार ने 452 मदरसों को बड़ी राहत दी है। पहले अधिनियम के तहत सभी मदरसों को उत्तराखंड बोर्ड रामनगर से संबद्धता लेनी थी। इनमें से करीब 400 मदरसे ऐसे हैं जो केवल आठवीं तक की पढ़ाई ही कराते हैं। मदरसा संचालकों के अनुरोध पर उनकी सुविधा के लिए कक्षा एक से आठवीं तक के संचालन करने वाले मदरसों की संबद्धता अब जिला स्तरीय शिक्षा समिति या शासन की ओर से निर्धारित सक्षम अधिकारी के स्तर से संबद्धता दी जाएगी। केवल कक्षा नौ से 12वीं तक की पढ़ाई कराने वाले करीब 52 मदरसों को ही उत्तराखंड बोर्ड से संबद्धता लेनी होगी। संबद्धता के बाद अल्पसंख्यक प्राधिकरण इन्हें मान्यता देगा। कानून में इस बदलाव के लिए कैबिनेट ने संशोधन को मंजूरी दी, जिसका अध्यादेश लाया जाएगा।

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कुंभ : पांच करोड़ से ऊपर के काम ही शासन स्तर से स्वीकृत होंगे
अगले साल होने वाले कुंभ मेले के लिए अस्थायी व स्थायी निर्माण कार्य हो रहे हैं। सरकार ने इसके लिए बजट स्वीकृति की प्रक्रिया को सरल बना दिया है। कैबिनेट ने तय किया है कि अब एक करोड़ तक के सभी तरह के निर्माण कार्यों की स्वीकृति मेलाधिकारी के स्तर से होगी। एक से पांच करोड़ तक के कार्यों की स्वीकृति गढ़वाल मंडलायुक्त के स्तर से होगी। केवल पांच करोड़ से ऊपर के कार्यों का प्रस्ताव ही शासन को भेजा जाएगा।
 

ये भी हुए अहम फैसले
– उत्तराखंड मोटरयान (संशोधन) नियमावली 2026 को मंजूरी। परिवहन विभाग में पूर्व में सृजित पदों के सापेक्ष वर्दी निर्धारण होगा। इसके तहत आरटीओ प्रवर्तन, प्रवर्तन चालक वर्दी पहनेंगे।
– उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नियमावली 2026 मंजूर। अब जिला सैनिक कल्याण अधिकारी भी होंगे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पदेन सदस्य। एसिड अटैक पीड़िता को भी मिलेगा निशुल्क सेवा का लाभ।
– औद्योगिक विकास विभाग के तहत उत्तराखंड उप खनिज परिहार नियमावली 2023 में संशोधन करते हुए पूर्व में खनिज पर निर्धारित रॉयल्टी की दर सात रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर आठ रुपये प्रति क्विंटल करने को मंजूरी।
– पूर्व में पारित आबकारी नीति के तहत छह प्रतिशत वैट की दरों का निर्धारण किया गया था। आबकारी नीति के अनुसार ही वाणिज्य कर विभाग ने अपनी नियमावली में छह प्रतिशत वैट की दरों के संशोधन का प्रस्ताव भेजा था, जिसे कैबिनेट ने स्वीकृति दे दी है।
– परिवहन विभाग की ओर से 250 रोडवेज बस खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी।
– परिवहन विभाग के पूर्व में शासन से मंजूर 100 रोडवेज बसों की खरीद के मामले में संशोधन को मंजूरी। जीएसटी 28 से 18 प्रतिशत होने के कारण अब 109 बसों के खरीद प्रस्ताव पर कैबिनेट की मुहर।
– विभिन्न विभागों में एकल संवर्ग में एक वर्ष के भीतर प्रतीक्षा सूची प्राप्त हो गई है तो उसके अनुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी। भविष्य के लिए एक स्पष्ट एसओपी बनाई जाएगी, ताकि सभी विभागों और आयोगों में इस पर स्पष्टता रहे।
– सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका रजनीश कुमार पांडे व अन्य बनाम भारत सरकार पर 28 अक्तूबर 2021 को निर्णय पारित हुआ था। उसके अनुसार विशेष शिक्षा शिक्षक के पदों पर भर्ती के लिए उत्तराखंड विशेष शिक्षा शिक्षक नियमावली को मंजूरी।
– उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा शैक्षिक संवर्ग सेवा नियमावली 2026 के प्रख्यापन को मंजूरी। पूर्व में प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता, सहायक अध्यापक के 62 पद सृजित थे लेकिन उनकी सेवा नियमावली प्रख्यापित नहीं थी। इस कारण अध्यापकों के प्रमोशन प्रभावित हो रहे थे।
– लोक निर्माण विभाग में वर्ष 2023 में जेई के 2010 पदों पर भर्ती हुई थी। इसमें दिव्यांग श्रेणी के अभ्यर्थी न मिलने के कारण सात आरक्षित पदों पर सामान्य अभ्यर्थी भर्ती किए गए थे। इस पर हाईकोर्ट का आदेश आया था, जिसके तहत अब सात पद अलग से दिव्यांग श्रेणी के सृजित किए जाएंगे।
– एक जनवरी 2026 को कैबिनेट के फैसले के तहत पेंशन के लिए अर्हकारी सेवा और विधिमान्य अधिनियम के संबंध में 16 जनवरी 2026 को वर्कचार्ज कर्मियों को पेंशन देने व उनकी सेवा की गणना के संबंध में शासनादेश जारी हुए थे, जिस पर कुछ कार्मिक हाईकोर्ट चले गए थे। हाईकोर्ट ने इस पर स्टे लगा दिया था, जो मंत्रिमंडल के संज्ञान में लाया गया।
– उत्तराखंड अधिप्राप्ति नियमावली 2025 के अंतर्गत सूचीबद्ध डी श्रेणी के ठेकेदारों के लिए निविदा सीमा को एक करोड़ से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ करने का प्रस्ताव मंजूर।
– राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अब प्रदेश के उन 21 अशासकीय महाविद्यालयों में भी मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना का लाभ मिलेगा, जिनमें नियमित प्राचार्य हैं।

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