शुक्रवार का दिन दिल्ली सर्राफा बाजार के लिए भारी उथल-पुथल वाला रहा। कीमती धातुओं, खासकर चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखी गई। स्थानीय बाजार में सुस्त मांग और वैश्विक संकेतों के बीच चांदी की कीमत एक ही दिन में 5% से अधिक टूटकर 2.55 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई। सोने की कीमतों में भी भारी नरमी देखी गई, इससे निवेशकों और ज्वैलर्स ने सतर्कता बरती।
कीमतों में भारी करेक्शन: क्या कहते हैं आंकड़े?
ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को बाजार में व्यापक बिकवाली का दबाव रहा:
-
- चांदी की चमक फीकी: चांदी की कीमत में ₹13,500 की भारी गिरावट दर्ज की गई। यह 5.03% टूटकर ₹2,55,000 प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) पर बंद हुई। गुरुवार को यह ₹2,68,500 प्रति किलोग्राम पर स्थिर थी।
-
- सोना हुआ सस्ता: 99.9% शुद्धता वाले सोने की कीमत में भी 2,400 रुपये की गिरावट आई। यह 1.5% टूटकर ₹1,58,500 प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जो पिछले कारोबारी सत्र में ₹1,60,900 प्रति 10 ग्राम पर था।
बाजार में गिरावट की वजह
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के कमोडिटी सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी के अनुसार, शुक्रवार को व्यापक बाजार में बिकवाली के कारण सोने और चांदी की कीमतों में यह तेज गिरावट आई। निवेशक अमेरिका के बहुप्रतीक्षित उपभोक्ता मुद्रास्फीति आंकड़ों से पहले सतर्क रुख अपना रहे हैं, जिसका असर घरेलू कीमतों पर दिखा। इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर मांग का कमजोर होना भी इस गिरावट का एक प्रमुख कारण है।
घरेलू और वैश्विक बाजार की चाल अलग-अलग दिशा में
जहां घरेलू बाजार में कीमतें धड़ाम हुई हैं, वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार को रिकवरी के संकेत मिले।
- अंतरराष्ट्रीय रिकवरी: कोटक सिक्योरिटीज की एवीपी (कमोडिटी रिसर्च) कायनात चैनवाला के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट सिल्वर 3% उछलकर 77.30 डॉलर प्रति औंस और सोना करीब 1% की बढ़त के साथ 4,968.40 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था।
- रिकवरी का स्तर: बाद में चांदी 79 डॉलर प्रति औंस और सोना 4,990 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गया।
बाजार के जानकार क्या कहा रहे?
बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि कीमती धातुओं की दिशा अब पूरी तरह से अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर है।
महंगाई के आंकड़े: यदि अमेरिका में महंगाई के आंकड़े नरम आते हैं, तो फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें बढ़ेंगी, इससे सोने-चांदी की कीमतों को स्थिरता मिलेगी। वहीं, अगर महंगाई बनी रहती है, तो फेड ‘हायर-फॉर-लॉन्गर’ (ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची) की नीति पर कायम रह सकता है, जो कीमतों पर दबाव बनाए रखेगा।
भू-राजनीतिक तनाव: रूस-यूक्रेन मोर्चे पर तनाव कम होने और अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता के फिर से शुरू होने की चर्चाओं ने सोने की ‘सुरक्षित निवेश’ वाली मांग को थोड़ा कमजोर किया है।
चांदी पर चीन और अमेरिका का असर
विशेषज्ञों ने बताया कि चांदी पर दोहरे दबाव काम कर रहे थे। एक तरफ अमेरिका में मौजूदा घरों की बिक्री के कमजोर आंकड़े थे, तो दूसरी तरफ लूनर न्यू ईयर की छुट्टियों से पहले चीन में औद्योगिक मांग सुस्त पड़ने की चिंता थी। हालांकि, शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई तेजी ने संकेत दिया है कि निचले स्तरों पर खरीदारी लौट रही है।
घरेलू बाजार में आई यह भारी गिरावट खुदरा खरीदारों के लिए एक मौका हो सकती है, लेकिन बाजार की नजरें अमेरिका के सीपीआई डेटा पर आधारित हैं। जब तक वैश्विक अनिश्चितता और ब्याज दरों की दिशा साफ नहीं होती, सर्राफा बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।







