अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एम्स) ने इलाज के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब ऑनलाइन अपॉइंटमेंट वाले मरीजों और दूसरे अस्पतालों से रेफर होकर आने वाले मरीजों को ही प्राथमिकता दी जाएगी। एम्स के निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास ने बताया कि एम्स छोटी-मोटी बीमारियों जैसे खांसी-जुकाम के लिए नहीं बना है। यह सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल है, जहां गंभीर और जटिल मामलों का इलाज होता है।
हर साल आते हैं 50 लाख मरीज
उन्होंने कहा कि हर साल एम्स की ओपीडी में करीब 50 लाख मरीज आते हैं। इतनी बड़ी संख्या में संसाधन कम पड़ जाते हैं। इसलिए प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सामान्य बीमारियों के लिए लोग स्थानीय अस्पतालों या क्लिनिक में जाएं।









