अच्छे बच्चे नहीं थे भगत सिंह’, IAS अधिकारी रिंकू सिंह के बिगड़े बोल, शहीद के अपमान पर लोगों में नाराजगी

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जालौन के उरई कलक्ट्रेट सभागार में आयोजित कार्यक्रम में आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही के संबोधन सोशल मीडिया पर वायरल रहा है। वायरल वीडियो में वह शहीद-ए-आजम भगत सिंह पर टिप्पणी करते सुनाई दे रहे हैं। कह रहे हैं कि आज के समय के हिसाब से भगत सिंह सबसे बड़े बेवकूफ थे। वह कभी अच्छे बच्चे नहीं थे।

हालांकि, वायरल वीडियो के सामने आए अंश के आधार पर ही उनकी पूरी टिप्पणी का संदर्भ स्पष्ट नहीं हो सका है। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोग टिप्पणी को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

बयान ने स्थानीय स्तर पर भी चर्चा छेड़ी
उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष किया और महज 23 वर्ष की उम्र में शहादत दी थी। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उनके व्यक्तित्व और योगदान को लेकर सामने आए कथित बयान ने स्थानीय स्तर पर भी चर्चा छेड़ दी है।

तहसीलदार और नायब तहसीलदार पर विभागीय कार्रवाई की संस्तुति
उपजिलाधिकारी (न्यायिक) उरई रिंकू सिंह राही ने तहसीलदार शिरीश कुमार मिश्र और नायब तहसीलदार राहुल यादव के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की है। यह संस्तुति राजस्व वाद की सुनवाई के दौरान नियमों का पालन न करने के मामले में की गई है।

एसडीएम न्यायिक ने दोनों अधिकारियों की आख्या को उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता के नियमों के विपरीत पाया है। उन्होंने कार्रवाई के लिए मामला राजस्व परिषद, लखनऊ को भेजा है। साथ ही अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी को भी पत्र भेजा गया है।

यह मामला वाद संख्या टी-202606350305945, भगीरथ बनाम अमर सिंह से जुड़ा है। यह वाद उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 116 के तहत दर्ज हुआ था। वाद मौजा बड़ेरा, परगना उरई से संबंधित है। वाद 27 अप्रैल 2026 को दाखिल किया गया था।

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इसकी पहली सुनवाई उसी दिन 27 अप्रैल को हुई थी। दूसरी सुनवाई दो मई और तीसरी सुनवाई 22 मई को हुई थी। बाद में यह मामला न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया। न्यायालय ने तहसीलदार और नायब तहसीलदार से संबंधित प्रक्रिया पर आख्या मांगी थी।

न्यायालय की आख्या में नियमों की अनदेखी का मामला
तहसीलदार शिरीश कुमार मिश्र ने पांच अगस्त को अपनी आख्या प्रस्तुत की। नायब तहसीलदार राहुल यादव ने भी पांच अगस्त को अपनी आख्या दी थी। एसडीएम न्यायिक के पत्र में कहा गया है कि अधिकारियों ने कुर्रा तैयार करने में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2016 के नियमों के पालन की बात कही।
वहीं, संबंधित पत्रावली में कुर्रा आज तक प्रस्तुत ही नहीं किया गया था। आख्या में इसकी वास्तविक स्थिति भी स्पष्ट नहीं की गई थी। न्यायालय ने इस गंभीर चूक को गंभीरता से लिया है। यदि कुर्रा प्रस्तुत नहीं हुआ और नियमों के पालन की आख्या दी गई, तो यह राजस्व कार्रवाई में गंभीर लापरवाही है। यह स्थिति राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाती है।
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