बनभूलपुरा में रेलवे जमीन मामले में 24 फरवरी को हुई सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश दिया। इसकी कॉपी स्थानीय स्तर पर संबंधित पक्षों को मिल गई। इसमें कोर्ट ने कई बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट की है। पुनर्वास के मद्देनजर प्रधानमंत्री आवास योजना के आवेदन के लिए शिविर में पात्रता व अपात्रता दोनों की रिपोर्ट बननी है। उत्तराखंड राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (यूएसएलएसए) शिविर को राजस्व अधिकारियों के साथ लगाएगा। इसके साथ अलग से एक रिपोर्ट तैयार होगी जिसमें आवेदक परिवारों समग्र सामाजिक-आर्थिक स्थितियों का उल्लेख होगा। मामले में अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी।
19 से 31 मार्च तक लगेंगे शिविर
आदेश में उल्लेख है कि 50 हजार से अधिक लोगों के पुनर्वास के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत आवेदन जमा करने के लिए 19 से 31 मार्च तक शिविर लगेगा। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान गतिरोध को अनिश्चितकाल तक जारी नहीं रखा जा सकता है। 24 जुलाई की सुनवाई में ही लगभग 30.040 हेक्टेयर सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण बताया गया। इसमें 4,365 घर बने हैं।
प्रभावित परिवार को हर माह दो हजार देने का उल्लेख
रेलवे और राज्य सरकार के अधिवक्ताओं ने प्रत्येक परिवार के मुखिया को संरचनाओं के विध्वंस के लिए प्रति माह 2,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की बात कही। इस पर अपीलकर्ता के अधिवक्ता ने पुनर्वास के उनके अधिकार के संबंध में आपत्तियां उठाईं। रेलवे परियोजना के लिए भूमि की आवश्यकता पर भी सवाल उठाया। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कब्जाधारियों को अतिक्रमणकारी बताया। सभी पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने कहा कि कई कब्जाधारियों की वित्तीय स्थिति को देखते हुए एक बड़ी संख्या आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अंतर्गत आ सकती है।
सभी से करवाएं आवेदन
कोर्ट ने सभी प्रभावितों से शिविर में आवेदन करवाने के लिए कहा है। निर्देश दिए कि आवेदन प्रक्रिया 31 मार्च के पहले पूरी कर लें। इसके लिए एक से ज्यादा शिविर लगा सकते हैं। शिविर तब तक जारी रखे जाएंगे जब तक सभी कब्जाधारियों को आवेदन करने का अवसर नहीं मिल जाता है। योजना के प्रचार व प्रसार के लिए एनजीओ, सामाजिक कार्यकर्ता की मदद ले सकते हैं।








