Ban: भारत ने चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई, फैसला सितंबर तक रहेगा प्रभावी

 

भारत सरकार ने बुधवार को तत्काल प्रभाव से चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया। निर्यात पर यह रोक 30 सितंबर या अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी। सरकार ने यह कदम देश में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और इसकी कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाया है।

 

भारत से चीनी निर्यात पर प्रतिबंध क्यों?
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले विदेश व्यापार महानिदेशालय की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। इसके अनुसार, यह प्रतिबंध कच्ची, सफेद और परिष्कृत चीनी पर लागू होता है। सरकार ने नीति में बदलाव करते हुए चीनी को निषिद्ध श्रेणी में रख दिया है। सरकार ने कहा कि यह प्रतिबंध मौजूदा टैरिफ-दर कोटा और व्यवस्थाओं के तहत यूरोपीय संघ और अमेरिका को चीनी निर्यात पर लागू नहीं होगा।

खरीदारों को अधिक शिपमेंट भेजने का अवसर
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने स्थानीय कीमतों को नियंत्रित करने के लिए चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगाया है। सरकार का यह कदम वैश्विक सफेद और कच्ची चीनी की कीमतों को सहारा दे सकता है। इससे ब्राजील और थाईलैंड जैसे प्रतिद्वंद्वी उत्पादकों को एशियाई और अफ्रीकी खरीदारों को अधिक शिपमेंट भेजने का अवसर मिलेगा। भारत, ब्राजील के बाद दुनिया का सबसे बड़ा चीनी निर्यातक है।

अगले सीजन का उत्पादन शुरुआती अनुमानों से कम?
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने पहले मिलों को 1.59 मिलियन टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी। लेकिन अब उत्पादन लगातार दूसरे वर्ष खपत से कम रहने की उम्मीद है। प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में गन्ने की पैदावार कमजोर हुई है। अल नीनो मौसम की स्थिति इस वर्ष के मानसून को बाधित कर सकती है। इससे अगले सीजन का उत्पादन शुरुआती अनुमानों से कम रहने का जोखिम बढ़ गया है।

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उत्पादन और निर्यात की वर्तमान स्थिति
निर्यात के लिए स्वीकृत 1.59 मिलियन टन में से व्यापारियों ने लगभग 800,000 टन के अनुबंध किए थे। इसमें से 600,000 टन से अधिक चीनी पहले ही भेजी जा चुकी है। सरकार ने कच्ची और सफेद चीनी के निर्यात पर रोक लगाने की बात कही है। हालांकि, निर्यात पाइपलाइन में पहले से मौजूद शिपमेंट को कुछ शर्तों के तहत आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी।

प्रतिबंध के नियम और बाजार पर प्रभाव
यदि आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना के प्रकाशन से पहले लोडिंग शुरू हो गई थी, तो खेपों को अनुमति दी जाएगी। यदि शिपिंग बिल दाखिल किया गया था और जहाज भारतीय बंदरगाह पर पहले ही पहुंच चुका था, तो भी निर्यात की अनुमति होगी। यदि चीनी अधिसूचना के प्रकाशन से पहले सीमा शुल्क या संरक्षक को सौंप दी गई थी, तो भी शिपमेंट को मंजूरी मिलेगी। मुंबई के एक व्यापारी ने कहा कि फरवरी में दिए गए अतिरिक्त निर्यात कोटे के कारण व्यापारियों को अब निर्यात आदेश पूरे करने में परेशानी होगी। प्रतिबंध की घोषणा के बाद न्यूयॉर्क कच्ची चीनी वायदा 2 फीसदी से अधिक बढ़ा, जबकि लंदन सफेद चीनी वायदा 3 फीसदी उछल गया।

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