आजम खां और अब्दुल्ला को भेजा गया जेल- बड़े बेटे अदीब ने पिता का गाल चूमा, भाई को लगाया गले

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दो पैन कार्ड मामले में मंगलवार को एमपी-एमएलए कोर्ट ने सपा नेता आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दोषी करार दिया तो वहां का माहौल एकदम बदल गया। फैसला सुनते ही दोनों कुछ क्षणों तक एक-दूसरे को देखते रह गए। चेहरे पर तनाव और भविष्य की चिंता साफ झलक रही थी। जेल जाने से पहले बड़े बेटे अदीब ने आजम खां का गला चूमा और भाई अब्दुल्ला को गले लगाया।

 

दोपहर बाद कोर्ट ने सजा सुनाते हुए आजम खां और अब्दुल्ला आजम को सात-सात साल की कैद और 50–50 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया। इसके बाद दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में लेते हुए जिला जेल भेज दिया गया। यह मामला 2019 में गंज थाने में दर्ज हुआ था। जब शहर विधायक आकाश सक्सेना ने अब्दुल्ला आजम पर दो जन्म प्रमाणपत्र रखने का आरोप लगाया था।

 

उन्होंने दर्ज प्राथमिकी में कहा था कि एक लखनऊ नगर निगम का और दूसरा रामपुर नगरपालिका परिषद से बनाया गया है। विवेचना के बाद पुलिस ने आजम खां, अब्दुल्ला और पूर्व विधायक डॉ. तजीन फात्मा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। सुनवाई एमपी-एमएलए विशेष न्यायाधीश शोभित बंसल की अदालत में चल रही थी।

मंगलवार दोपहर अदालत ने दोनों को दोषी करार दिया और कुछ देर बाद सजा का एलान कर दिया। फैसले के समय वादी और भाजपा विधायक आकाश सक्सेना भी कोर्ट में मौजूद रहे। उनके कोर्टरूम में प्रवेश करते ही उनकी नजर आजम खां और अब्दुल्ला से मिली। बाहर निकलकर विधायक आकाश सक्सेना ने फैसले को सत्य और न्याय की जीत बताया।

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हाईकोर्ट ने विधायकी की थी निरस्त 
सपा नेता आजम खां रामपुर विधानसभा सीट से दस बार विधायक रहे चुके हैं। वो प्रदेश में चार बार कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं। इसके अलावा को 2019 में रामपुर संसदीय सीट से लोकसभा का चुनाव जीते थे और एक बार वो राज्यसभा के सदस्य भी रहे हैं। उन्होंने पुत्र अब्दुल्ला को उन्होंने 2017 में विधायक तो बनवा दिया लेकिन उम्र के विवाद में हाईकोर्ट ने उनकी विधायकी निरस्त कर दी।

 

अब्दुल्ला 2022 में फिर से स्वार सीट से विधायक बन गए लेकिन छजलैट प्रकरण के मुकदमे में मुरादाबाद की कोर्ट से दो साल की सजा सुनाए जाने के कारण उनकी विधायकी चली गई। दरअसल शैक्षिक प्रमाणपत्रों में अब्दुल्ला आजम की जन्म तिथि 01 जनवरी 1993 है। इसके हिसाब से वो 2017 का विधानसभा चुनाव के दौरान न्यूनतम आयु की सीमा को पूरा नहीं करते थे।

ऐसी स्थिति में उन्होंने अपनी जन्म तिथि 30 सितंबर 1990 बताकर चुनाव लड़ा। उनका एक जन्म प्रमाणपत्र लखनऊ नगर निगम से जारी हुआ है दो दूसरा रामपुर नगरपालिका से। 2017 में जब अब्दुल्ला ने सपा की टिकट पर चुनाव जीता था तो उनके मुकाबले बसपा के प्रत्याशी रहे नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने उनके निर्वाचन को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में चुनावी याचिका दायर की थी।

हाईकोर्ट ने उनकी चुनाव याचिका पर अपना फैसला देते हुए अब्दुल्ला की विधायकी को निरस्त कर दिया। अब्दुल्ला इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ले गए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट से भी उनको झटका लगा था।

 

सत्ता परिवर्तन के बाद उस वक्त के भाजपा नेता और वर्तमान में शहर विधायक आकाश सक्सेना ने इस मामले को लेकर गंज थाने में अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाणपत्र होने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया। उनका आरोप था कि अब्दुल्ला ने चुनाव लड़ने के लिए दो-दो जन्म प्रमाण पत्र बनवाए और इनका इस्तेमाल भी किया।
कोर्ट ने गुनहगार समझा, सजा सुनाई: आजम
सात साल की सजा मिलने के बाद सपा नेता आजम खां बेहद शांत नजर आए। कोर्टरूम से बाहर लाए जाने पर पत्रकारों ने जब प्रतिक्रिया जाननी चाही तो उन्होंने कुछ ही शब्दों में अपना दर्द बयां कर दिया। आजम खां ने कहा कि कोर्ट ने गुनहगार समझा और सजा सुना दी। इस पर कुछ नहीं कहना। यह अदालत का फैसला है।

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