बदरीनाथ चढ़ावा प्रकरण- गोदियाल-द्विवेदी में चले शब्दों के बाण, एक दूसरे को दे डाली खुली बहस की चुनौती

बदरीनाथ धाम में कथित चढ़ावा चोरी मामले को लेकर अब बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल आमने सामने आ गए हैं। दोनों ने मामले में एक दूसरे को खुली बहस की चुनौती दे डाली।

हेमंत द्विवेदी ने कहा, मैंने बहस के लिए स्थान तय किया है और समय व दिन गोदियाल तय करें। बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले में अध्यक्ष के रूप में मेरी भी नैतिक जिम्मेदारी है, लेकिन इस्तीफा देने का सवाल नहीं उठता है। प्रकरण की त्रिस्तरीय जांच चल रही है। जांच में दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिलेगी।
बुधवार को केनाल रोड स्थित बीकेटीसी कार्यालय में प्रेसवार्ता में द्विवेदी ने बीकेटीसी अध्यक्ष पद गोदियाल के कार्यकाल में नियम विरुद्ध नियुक्ति, मंदिर कोष से दी गई राशि में अनियमितता के आरोपों के साक्ष्य पेश कर पलटवार किया। उन्होंने कहा, बदरी विशाल व बाबा केदार की पवित्र परंपराओं, श्रद्धालुओं की भावनाओं व मंदिर समिति की गरिमा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता को स्वीकार नहीं किया जा सकता। जांच में जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।
द्विवेदी ने कहा, आरोपी कर्मचारी प्रमोद नौटियाल ने 2003 में इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के पद नियुक्त के लिए बीकेटीसी को पत्र लिखा था, जिसमें ब्लैसनेट इंडिया कंपनी मुंबई में काम करने का अनुभव होने का जिक्र किया। उनके पत्र के आधार पर अस्थायी तौर पर आठ हजार वेतन पर नियुक्ति दी गई। शासन ने बीकेटीसी के 34 कर्मचारियों को स्थायी करने की स्वीकृति दी और नौटियाल को इंटरनेट कोऑर्डिनेटर पर नियमित किया। इसके बाद नौटियाल को तत्कालीन अध्यक्ष गोदियाल ने वैयक्तिक सहायक का अतिरिक्त प्रभार दिया और 2018 में नियमों का ताक पर रख कर 2800 ग्रेड वेतन से सीधे 4600 ग्रेड वेतन स्वीकृत किया।

प्रताप नगर टिहरी में निजी भूमि पर मंदिर कोष से नौ लाख की लागत से सड़क निर्माण कराया, एक निजी फर्म को डॉक्यूमेंट्री बनाने के लिए 12 लाख और पोखरी स्थित शिव मंदिर जीर्णोद्धार के लिए 39 हजार रुपये खर्च किए। जबकि ये मंदिर बीकेटीसी के अधीन नहीं है। बोर्ड बैठक में कम से पांच सदस्य होने चाहिए, लेकिन गोदियाल के कार्यकाल में तीन सदस्यों की मौजूदगी में मंदिरों के निर्माण के लिए लाखों रुपये देने का प्रस्ताव गुपचुप तरीके पारित किया गया।

गोदियाल को सार्वजनिक बहस की चुनौती दोहराते हुए कहा कि वह यदि वे चाहें तो बदरीनाथ या केदारनाथ धाम के पवित्र प्रांगण में खुली चर्चा के लिए उपस्थित हों और अपने कार्यकाल के दौरान मंदिर समिति की मर्यादाओं, परंपराओं तथा संसाधनों के उपयोग को लेकर जनता के समक्ष स्थिति स्पष्ट करें। उन्होंने कहा कि मंदिर समिति में जहां पर वित्तीय अनियमितता हुई है, उसकी जांच कराई जाएगी। इस मौके पर राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष सुभाष बर्थ्वाल व भाजपा प्रवक्ता हनी पाठक मौजूद रहीं।

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गोदियाल का पलटवार, भगवान की तिजोरी से चोरी करने वाले सच बोलेंगे

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के आरोपों पर पलटवार करते हुए केदारनाथ या बदरीनाथ धाम में खुली बहस की चुनौती को स्वीकार किया। द्विवेदी जहां भी बहस करना चाहते हैं वहां आने के लिए तैयार हूं। जल्द ही समय व दिन तय कर बीकेटीसी अध्यक्ष को सूचित करूंगा।

गोदियाल ने कहा, जिन लोगों की मंशा भगवान की तिजोरी से चोरी करने की है, उनसे सच बोलने की उम्मीद नहीं की जा सकती है। बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच प्रभावित न हो, इसके लिए हेमंत द्विवेदी तत्काल अध्यक्ष पद से इस्तीफा दें। द्विवेदी की ओर से आरोप लगाए कि टिहरी के प्रतापनगर में सड़क निर्माण के नौ लाख रुपये खर्च किए। जबकि गणेश मंदिर के संपर्क मार्ग बनाने को यह राशि दी गई। इसके लिए बिनसर व पोखरी के शिव मंदिर निर्माण के राशि दी गई। हमने मंदिर कोष से निर्माण कार्य कराए हैं, कोई गबन नहीं किया गया है। इसके लिए 12 लाख रुपये से डॉक्यूमेंट्री बनाने के आरोप लगाए।

जबकि सच्चाई यह है कि फिल्म बनाकर कैसेट बेचने से मंदिर समिति को लाभ हुआ है। बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावा चोरी पकड़ने से बीकेटीसी अध्यक्ष तिलमिलाए हुए हैं। उनके आरोपों में सच्चाई है तो सरकार जांच कराए। तीन साल पहले मैंने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर उनके ऊपर लग रहे आरोपों की किसी भी तरह की जांच कराने का आग्रह किया था।

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