अधिसूचना जारी होने के बाद अब सरकार नए नगर निगम, नगर पालिका या नगर पंचायतों का गठन नहीं कर सकती। न ही किसी गांव को नगर निकाय में शामिल कर सकती है। जनगणना के सटीक आंकड़ों के लिए यह अनिवार्य है कि इस दौरान जिलों, तहसीलों और वार्डों की सीमाएं स्थिर रहें। यदि जनगणना के बीच में सीमाएं बदलती हैं तो जनसंख्या का डाटा मिसमैच व गलत हो सकता है। हालांकि सार्वजनिक सुविधाओं और सामान्य सरकारी कामकाज पर इसका कोई असर नहीं होगा।
बर्फबारी वाले क्षेत्रों में सितंबर में गणना
उत्तराखंड के बर्फबारी वाले क्षेत्रों में लोगों की गणना इसी साल 11 से 30 सितंबर के बीच होगी। इसका कारण ये है कि इन क्षेत्रों के लोग बर्फबारी होने के बाद दूसरे क्षेत्रों में पलायन कर जाते हैं।