एक स्कूल ऐसा भी- गजब…प्रिंसिपल बना चपरासी,नियमों के खेल ने विभाग को उलझाया, जानिये पूरा मामला

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कुमाऊं का एक स्कूल ऐसा भी है जहां घंटी बजाने वाले चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को प्रिंसिपल की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। ऐसा हुआ है सीमांत जिले पिथौरागढ़ के मुनस्यारी विकासखंड में। इस ब्लॉक के जीआईसी खतेड़ा में प्रभारी प्रधानाचार्य ने अपना पद त्यागा तो नियमों की आड़ में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को सर्वेसर्वा बना दिया गया। अब यहां सरकारी जिम्मेदारियां निभाने से लेकर फैसले लेने तक का दायित्व चपरासी के कंधों पर है। राजकीय शिक्षकों ने विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन के तहत पठन-पाठन के अलावा कोई विभागीय काम न करने और दायित्व न संभालने का ऐलान किया है।

जीआईसी और हाईस्कूलों में शिक्षकों का प्रभारी प्रधानाचार्य का दायित्व त्यागना भी इसी नाराजगी का हिस्सा है। शिक्षकों के इस ऐलान ने पूरे शिक्षा विभाग का गणित खराब कर दिया है। मुनस्यारी विकासखंड के जीआईसी खतेड़ा में हुई अजीब व्यवस्था इसी का नतीजा है। इस इंटर कॉलेज में स्थायी प्रधानाचार्य न होने से हिंदी के प्रवक्ता छोटे सिंह को प्रभार दिया गया था। संघ के फैसले के बाद उन्होंने बाकायदा हस्ताक्षर और मुहर के साथ पत्र लिखकर अपना पद त्याग दिया। विद्यालय में शिक्षकों के अलावा अन्य कोई कर्मचारी न होने से यहां तैनात एकमात्र चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को दायित्व सौंप दिया। अब यहां चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर तैनात राजू गिरी प्रिंसिपल की जिम्मेदारी संभालेंगे। ऐसा पहली बार हुआ है जब शिक्षा विभाग में किसी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को प्रभारी प्रधानाचार्य बनाया गया है। यह मामला चर्चाओं में है।
नियमों का बना मखौल
जीआईसी खतेड़ा में हिंदी प्रवक्ता के साथ एक अन्य स्थायी शिक्षक और पांच अतिथि शिक्षक तैनात हैं। इसके अलावा यहां सिर्फ एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की तैनाती है। स्थायी शिक्षक प्रभार छोड़ रहे हैं जबकि अतिथि शिक्षकों को कोई भी सरकारी दायित्व नहीं दिया जा सकता। ऐसे में यहां प्रभारी प्रधानाचार्य का दायित्व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को दिया जा सकता है। इस नियम की आड़ में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पास प्रभारी प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी आ गई है।

राजकीय शिक्षक अपने आंदोलन के तहत छात्र और विभागीय हित में गलत निर्णय ले रहे हैं। यदि जीआईसी खतेड़ा के प्रभारी प्रधानाचार्य को चार्ज किसी को देना ही था तो वह मुझसे संपर्क कर सकते थे। उनका यह निर्णय सही नहीं है। जल्द ही इस मामले में उचित फैसला लिया जाएगा। -दिगंबर आर्या, खंड शिक्षा अधिकारी, मुनस्यारी


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