हमारे कई पड़ोसी हैं और कुछ दूसरे से बेहतर, बिना नाम लिए विदेश मंत्री जयशंकर ने पाकिस्तान पर कसा तंज

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मारे कई पड़ोसी हैं और कुछ दूसरे से बेहतर हैं। हाइफनेशन (अपने संबंधों को एक गुट या प्रतिद्वंद्वी के साथ जोड़े रखना) उस पड़ोसी के साथ किया जाता है जो हमारे लिए इतना अच्छा नहीं है। जब हम डी-हाइफनेशन कहते हैं, तो इसका मतलब है कि हमारा उद्देश्य यह है कि तीसरे देश हमारे बारे में जो भी फैसले लें, उनमें गणना का एक प्रमुख कारक यह हो कि हम उन्हें ध्यान में रखें। आप हमेशा इसे संतुलित करने के प्रयास से देखेंगे या अगर कोई स्थिति है कि जिसका लाभ अपने लिए उपयोग किया जाए। हमारे दृष्टिकोण से डी-हाइफनेशन का सबसे अच्छा तरीका शक्ति और क्षमता के मामले में दूसरे पक्ष से आगे निकलना है। यह बातें जेएनयू में अरावली शिखर सम्मेलन 2025 में बोलते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहीं।

जयशंकर ने ‘भारत और विश्व व्यवस्था’ विषय पर बोलते हुए कहा, राजनीतिक अस्थिरता के परिदृश्य में भारत को स्वयं ही सहयोग के लिए बुनियादी ढांचे का निर्माण करना होगा। भारत का लक्ष्य सिर्फ विकास नहीं, बल्कि स्थिरता के साथ आगे बढ़ना है। दुनिया चाहे जितनी अस्थिरता क्यों न हो, भारत को अपने रास्ते पर डटा रहना होगा।
भारत को एक ध्रुव के रूप में उभरने की तैयारी करते हुए एक बहुध्रुवीय वातावरण में काम करना होगा। अब वैश्विक परिदृश्य पर विचार करें और परिवर्तन की तीव्रता और उसके निहितार्थों पर विचार करें। वैश्विक विनिर्माण का एक तिहाई हिस्सा एक ही क्षेत्र में स्थानांतरित हो गया है, जिसके परिणामस्वरूप आपूर्ति श्रृंखलाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

टैरिफ अस्थिरता के कारण व्यापार गणनाएं उलट जा रही हैं। वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में व्यापक परिवर्तन आया है, जिसमें अमेरिका जीवाश्म ईंधन का प्रमुख निर्यातक तथा चीन नवीकरणीय ऊर्जा का प्रमुख निर्यातक बन गया है। डेटा के उपयोग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के विकास पर प्रतिस्पर्धी मॉडल हैं, जो एक-दूसरे से टकराते रहते हैं।

और पढ़े  जनता को नहीं पता पेलेट गन क्या होती है..पूर्व एसीपी केपी कुकरेती

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