राजनीतिक संघर्ष के लिए तैयार हूं, पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने देश छोड़ने की अटकलों को किया खारिज

Spread the love

 

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और सीपीएन-यूएमएलके प्रमुख केपी शर्मा ओली ने उन अटकलों को खारिज किया है, जिनमें कहा जा रहा था कि वह देश छोड़ने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने मौजूदा अंतरिम सरकार पर आरोप लगाया कि वह उनकी सुरक्षा और सरकारी सुविधाओं को छीनने की कोशिश कर रही है। ‘ढाका ट्रिब्यून’ अखबार की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।

ओली ने भक्त के गुंडु में पार्टी के संगठन ‘युवा संघ नेपाल’ को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह देश छोड़ने वाले नहीं हैं और राजनीतिक लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने समर्थकों से पूछा, क्या आपको लगता है कि हम यह देश इस आधारहीन सरकार को सौंपकर भाग जाएंगे? ओली ने कहा कि उनका लक्ष्य देश में शांति, सुशासन और सांविधानिक व्यवस्था की बहाली करना है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ओली ने हाल ही में नौ सितंबर को प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास ‘बलुवातार’ खाली किया था। यह कदम तब उठाया गया, जब जेन जेड के विरोध प्रदर्शनों के कारण उनकी सरकार गिर गई। इसके बाद वह भक्तपुर के गुंडु में एक किराए के मकान पर रहने चले गए। प्रदर्शनकारियों ने उनका निजी आवास जला दिया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार जनता की इच्छा से नहीं, बल्कि तोड़फोड़ और आगजनी के जरिए सत्ता में आई है। उन्होंने सरकार को चुनौती दी कि अगर विरोध प्रदर्शन के दौरान उनकी ओर से सरकारी अधिकारियों को कोई निर्देश दिए गए हैं, तो उन्हें सार्वजनिक किया जाए। ओली ने कहा, उन्हें हिम्मत से प्रकाशित करो। मेरे निर्देश सार्वजनिक करो। मेरे पास छिपाने जैसा कुछ नहीं है।

और पढ़े  होर्मुज: 'खाड़ी से ओमान तक कोई बंदरगाह नहीं रहेगा सुरक्षित', अमेरिका की नाकेबंदी वाली धमकी पर ईरान का पलटवार

ओली ने यह भी कहा कि उन्हें फिर से हमले होने का डर है। उन्होंने सरकार की आलोचना की कि वह उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकाम रही है। उन्होंने पूछा, सोशल मीडिया पर खुलेआम मेरे घर पर हमले की बातें हो रही हैं। सरकार क्या कर रही है? केवल देख रही है? उन्होंने उन रिपोर्ट पर भी आपत्ति जताई, जिनमें कहा जा रहा है कि सकार उनके साथ ही नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा, आरजू राणा देउबा, रमेश लेखक और दीपक खडका के पासपोर्ट जब्त करने का फैसला किया है। पूर्व प्रधानमंत्री ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाकर देश को असुरक्षा की स्थिति में धकेल रही है।

जेन-जेड के विरोध के दूसरे दिन ही ओली की सरकार गिर गई थी। मानवाधिकार संगठनों ने ओली और तत्कालीन गृहमंत्री रमेश लेख को विरोध के दौरान अत्यधिक बल प्रयोग करने का जिम्मेदार ठहराया है, जिससे दर्जों लोगों की मौत हुई थी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार प्रदर्शन की तीव्रता का अनुमान नहीं लगा सकी और सुरक्षा बलों का मनोबल गिरा हुआ है। जिसके कारण भारी जनहानि और संपत्ति की क्षति हुई। रिपोर्ट मे यह भी बताया गया कि आठ सितंबर को विरोध शांतिपूर्ण रहा। लेकिन अगले दिन पुलिस की ओर से गोली चलने के बाद हिंसा भड़क उठी।


Spread the love
  • Related Posts

    पश्चिम एशिया तनाव- सीजफायर के बीच दक्षिणी लेबनान में इस्राइली हमले जारी, UAE-ब्रिटेन के शीर्ष राजनयिकों की बैठक

    Spread the love

    Spread the loveपश्चिम एशिया इस समय बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहा है। एक ओर जहां संघर्ष के बीच युद्धविराम और बातचीत की उम्मीदें दिखाई दे रही हैं, वहीं दूसरी…


    Spread the love

    बंगाल में ED की बड़ी कार्रवाई: कोलकाता DCP के घर छापा, इस केस से जुड़ा है मामला

    Spread the love

    Spread the loveपश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ा कदम उठाते हुए कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर (डीसीपी) शांतनु सिन्हा बिस्वास के आवास पर…


    Spread the love