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प्रधानमंत्री मोदी 13 सितंबर को मणिपुर पहुंचे। यहां पीएम ने राज्य की जनता को संबोधित करते हुए दो साल से फैले तनाव और हिंसा के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा कि विकास के लिए शांति जरूरी है और मणिपुर आशा और शांति की भूमि है। पीएम ने अपील की कि मणिपुर की जनता हिंसा से आगे बढ़कर शांति का साथ दे, ताकि विकास हो सके। इतना ही नहीं उन्होंने विस्थापितों के लिए 500 करोड़ रुपये के पैकेज का एलान किया। साथ ही बिजली की समस्या को सुलझाने और राज्य को बेहतर तरह से जोड़ने का वादा किया।
पीएम के पूरे भाषण के केंद्र में दो विषय रहे। पहला- शांति की अपील और दूसरा विकास। ऐसे में यह जानना अहम है कि जिस मणिपुर में हिंसा को शुरू हुए दो साल हो चुके हैं, वहां अब क्या हालात हैं? बीते दो साल में ऐसा क्या-क्या हुआ है कि पीएम मोदी को यहां अब भी शांति की अपील करनी पड़ रही है? तनाव के इस माहौल के बीच प्रधानमंत्री का मणिपुर दौरा क्यों और कैसे संभव हो पाया? इसके अलावा उनकी सुरक्षा के लिए क्या-क्या इंतजाम किए गए?
इंफाल में करीब 237 एकड़ में फैले कांगला किले और चुराचांदपुर के पीस ग्राउंड के आसपास बड़ी संख्या में राज्य और केंद्रीय बलों के जवान तैनात किए गए। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के लिए यहां जिस भव्य मंच का निर्माण किया गया, उसके आसपास मार्ग पर बैरिकेड्स लगा दिए गए। संवेदनशील और सीमांत क्षेत्रों में तलाशी अभियान चलाया गया। सीआरपीएफ ने पहाड़ी और घाटी दोनों जिलों में असामाजिक तत्वों की आवाजाही पर रोक लगाने के लिए अस्थायी चौकियां स्थापित कीं। इसके लिए केंद्रीय अधिकारी बीते कई हफ्तों से मणिपुर में डेरा जमाए थे और मैतेई और कुकी समुदाय के नेताओं के साथ बैठक भी कर रहे थे।
राज्य कर्मचारियों के साथ केंद्रीय सुरक्षा दल कांगला किले का चौबीसों घंटे निरीक्षण कर रहे हैं और राज्य आपदा प्रबंधन बल की नौकाओं को किले के चारों ओर की खाइयों में गश्त के लिए लगाया गया। 1891 में रियासत के विलय से पहले कांगला किला तत्कालीन मणिपुरी शासकों की सत्ता का प्राचीन केंद्र हुआ करता था। तीन तरफ खाइयों और पूर्वी तरफ इंफाल नदी से घिरा यह किला एक बड़े पोलो मैदान, जंगल, मंदिरों के खंडहर और राज्य पुरातात्विक कार्यालयों से घिरा है।