अयोध्या: मिथिला कुंज के सद्गुरु देव ब्रह्मलीन — सरयू की गोद में हुआ अंतिम विलय

Spread the love

 

रामभक्ति और मानस साधना का एक युग हुआ समाप्त

 

 

 

नातन धर्म, रामभक्ति और मानस साधना के प्रखर आलोक, मिथिला कुंज के पूज्य श्री श्री 1008 स्वामी रामविहारी शरण रामयणी “मानस कोविद” लगभग 80वर्ष की आयु में ब्रह्मलीन हो गए। उनके देहावसान से अयोध्या की आध्यात्मिक धरती पर शोक की गहरी लहर दौड़ गई है।

ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत आचार्य रमाकांत शरण ने बताया कि बुधवार प्रातः 10 बजे सरयू के पावन तट पर उन्हें जल समाधि दी गई। आश्रम परिसर में हुई शोकसभा में संत-महंत, शिष्य और श्रद्धालुओं ने एक स्वर में कहा — “गुरुदेव का जीवन सनातन धर्म की ज्योति रहा, जो पीढ़ियों तक मार्गदर्शन करती रहेगी।”

स्वामी रामविहारी शरण का पूरा जीवन श्रीरामचरितमानस के गूढ़ अर्थों के प्रचार, धार्मिक साहित्य के संरक्षण और संत परंपरा के उत्थान को समर्पित रहा। जल समाधि के अवसर पर लगभग सैकड़ो की संख्या में शिष्य, संत और नगरवासी अपने सद्गुरु को अश्रुपूरित विदाई देंगे।

“गुरुदेव, आपकी वाणी रहेगी, उपस्थिति रहेगी… बस आपका स्वरूप सरयू में विलीन हुआ है


Spread the love
और पढ़े  अयोध्या- भगवान राम के मंदिर भी चोरो से सुरक्षति नहीं- सत्यभान सिंह जनवादी 
  • Related Posts

    अयोध्या- भगवान राम के मंदिर भी चोरो से सुरक्षति नहीं- सत्यभान सिंह जनवादी 

    Spread the love

    Spread the love     शहीद भगतसिंह स्मृति ट्रस्ट के चेयरमैन सत्यभान सिंह जनवादी ने राम मंदिर चढ़ावे में चोरी की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि अब…


    Spread the love

    सपा में टूट की खबर, 25 से 27 सांसदों के टूट जाने की बात, सपा का पलटवार

    Spread the love

    Spread the loveयूपी में समाजवादी पार्टी क्या टूटने जा रही है। बीते कुछ समय से भाजपा और उसके सहयोगी दलों के नेता लगातार सपा में टूट की बात कह रहे…


    Spread the love