पेट्रोल पंप: पुरानी कारें बैन लेकिन 40 वर्ष पुराने एयरक्राफ्ट उड़ रहे हैं, पूर्व वायुसेना पायलट ने उठाए सवाल

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दिल्ली सरकार ने 1 जुलाई से राजधानी में पुराने वाहनों पर कड़ा कदम उठाया है। नए नियम के तहत, 10 साल से पुराने डीजल और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहनों में अब पेट्रोल पंप ईंधन नहीं भर सकेंगे, चाहे वो गाड़ियां दिल्ली में पंजीकृत हों या नहीं। यह फैसला दिल्ली की वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या को देखते हुए लिया गया है।

इस फैसले के तहत, अगर कोई फ्यूल स्टेशन इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम की धारा 192 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। नियम का उल्लंघन करने वाले वाहन जब्त किए जा सकते हैं और उनके मालिकों पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

 

अब ईंधन भरवाने से पहले होगी पहचान
इस पाबंदी को प्रभावी बनाने के लिए दिल्ली के कई फ्यूल स्टेशनों पर ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जा रहे हैं। जो पुराने वाहनों की पहचान कर उन्हें तुरंत ब्लॉक कर सकते हैं। हालांकि फिलहाल यह नियम सिर्फ दिल्ली तक सीमित है, लेकिन 1 नवंबर से यह पड़ोसी जिलों में भी लागू किया जाएगा।
पूर्व वायुसेना पायलट ने फैसले पर उठाए सवाल
हालांकि, इस फैसले को लेकर जनता में नाराजगी है और इसकी आलोचना भी हो रही है। पूर्व भारतीय वायुसेना पायलट संजीव कपूर ने सोशल मीडिया पर इस नीति को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सिर्फ निजी गाड़ियों को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है। जबकि देश में कई अन्य पुराने वाहन अब भी नियमित रूप से इस्तेमाल हो रहे हैं।

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उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, “हम आज भी 40 साल पुराने एयरक्राफ्ट उड़ा रहे हैं। हमारे देश की कई ट्रेनें, बसें, नावें, फेरी और कमर्शियल प्लेन 30 साल से ज्यादा पुराने हैं और रोज चल रहे हैं। तो फिर सिर्फ निजी गाड़ियों पर ही पाबंदी क्यों?”

कालाबाजारी की भी जताई आशंका
संजीव कपूर ने इस कदम के संभावित दुष्परिणामों को लेकर भी चेताया। उनका मानना है कि अगर पुराने वाहनों के लिए ईंधन मिलना पूरी तरह बंद कर दिया गया, तो इससे ब्लैक मार्केट या एक अंडरग्राउंड नेटवर्क खड़ा हो सकता है। जो गैरकानूनी तरीके से इन वाहनों को चलाए रखेगा। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के आखिर में कहा, “यह मेरी राय है।”

जनता में विरोध के स्वर
दिल्ली सरकार के इस कदम का मकसद भले ही वायु प्रदूषण को कम करना हो, लेकिन इसे लेकर अब विरोध के स्वर भी उठने लगे हैं। सवाल यह है कि क्या इस तरह के कदम समान रूप से सभी क्षेत्रों पर लागू होने चाहिए। या फिर सिर्फ निजी गाड़ियों को ही इसका जिम्मेदार ठहराना उचित है?

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