रामनगरी में जानकीघाट प्रांगण में चल रहे सप्त दिवसीय सुखद सत्संग कथा का आज छठा दिन

अयाेध्या-

रामनगरी के श्रीरामवल्लभाकुंज, जानकीघाट प्रांगण में चल रहे सप्त दिवसीय सुखद सत्संग कथा में पंचम दिवस राष्ट्रीय संत व प्रखर वक्ता असंग देव महाराज ने कहा कि अयाेध्या मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की पावन नगरी है। जहां श्रीराम का अवतार हुआ था। इस पावन नगरी में महाराजा दशरथ काे पिता बनने का यश और काैशल्या काे भगवान की मां बनने का साैभाग्य प्राप्त हुआ। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय बाद आज भगवान राम का भव्य मंदिर बन रहा है। जाे हम सबके लिए खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसी विशेष आत्माएं हाेती हैं, जिनकी पवित्रता के कारण उस स्थान का कण-कण वंदन हाे जाता है। रामनगरी में जानकीघाट प्रांगण में चल रहे सप्त दिवसीय सुखद सत्संग कथा का आज छठा दिनउस स्थान का तिलक लगाने का मन करता है। यह तीर्थनगरी प्रभु श्री राम जन्मभूमि है। जहां के कण-कण में भगवान राम हैं। जन्म हर किसी का हाेता है। आज श्रीराम के नाते दशरथ काे पहचाना जाता है। श्रीराम व माता काैशल्या का संवाद हाेता है। राम माता काैशल्या से कहते हैं कि हे मां वह पुत्र बहुत बड़भागी है। जाे अपने माता-पिता के वचन से प्रेम रखता और आज्ञाकारी हाेता है। माता-पिता जाे बाेलते हैं। उससे सबका प्रेम हाेना चाहिए। प्रेम बहुत बड़ी चीज है। उन्होंने कहा कि जहां वासना का अंत हाे जाता है। वहां प्रेम हाेता है। जब तक प्रेम वासना से ओत-प्रोत रहता है। तब तक भाेगाें के कीचड़ में विचरण करता है। वासना से मुक्त प्रेम उपासना के जन्म-मरण से मुक्ति दिलाता है। गाय से प्रेम कराेगे। ताे पीने काे दूध मिलेगा। किसी प्रतिभा से प्रेम कराेगे। ताे उसके सामने दहकती ज्वालामुखी सी वासना बुझती नजर आयेगी। वहां उपासना का उदय हाेगा। गुरू गाेविंद सिंह सिक्ख धर्म के 10वें गुरु रहे। वह बड़े ही साहसी व वीर थे। धर्म की रक्षा करने में उनका अहम याेगदान है। इसकी खातिर उनके चार पुत्र बलिदान भी हाे गए। उस दाैरान मुस्लिम शासक सिक्खाें-हिंदुओं काे मुसलमान बना रहे थे। जिनके विरूद्ध गुरू गाेविंद अपने चार पुत्राें संग खड़े हुए और धर्म की रक्षा किया। आज पूरे देश में हाेड़ लगी है। काेई हिंदुओं काे ईसाई व काेई मुसलमान बनाने की काेशिश करता है। हिंदू वैसे भी बहुत कम है। हिंदू धर्म बहुत ही पवित्र एवं श्रेष्ठतम है। हिंदुओं में करूणा, दया है। उनका हृदय बहुत काेमल है। वह पूजा-पाठ करते और भक्त हैं। हम अपने हिंदू धर्म के प्रति दृढ़ बनें। चंद रूपयाें की खातिर किसी के बरगलाने में न आएं। अपना धर्म परिवर्तन कदाचित न करें। आज हम अपनी याेग्यताओं काे परखें। शक्तियों काे सही जगह लगाएं। कुछ पैसाें की खातिर अपने हिंदू धर्म काे खंडित करने की जरूरत नही है। संत असंग देव ने कहा कि मैं हिंदू धर्म में जन्म लेकर अपने आपकाे गाैरवांवित महसूस कर रहा हूं। साधु बनकर बहुत खुश हूं। हिंदुओं में स्वतंत्रता भी है। चाहे शाकाहारी बनकर रहाे या साधु। चाहे याेगी बनकर रहाे या गृहस्थ। इससे पहले भाजपा के बरखेड़ा पीलीभीत से विधायक स्वामी प्रवक्तानंद एवं पूर्व कमिश्नर अयोध्या मंडल कमल टावरी उर्फ कमलानंद ने असंग देव महाराज का स्वागत किया। इस अवसर पर श्रीरामवल्लभाकुंज अधिकारी राजकुमार दास, वैदेही भवन महंत रामजी शरण, कबीर मठ महंत उमाशंकर दास, कार्यक्रम प्रभारी प्रवीन साहेब, एडवोकेट कमलेश सिंह, हरीश साहेब, शैलेश साहेब, लखीमपुर खीरी प्रधान अनुभव साहेब, शीलदास साहेब, रवींद्र साहेब, आदित्य साहेब, सुरेश साहेब, सत्कर साहेब, नवीन साहेब, प्रेमपाल साहेब समेत बड़ी संख्या में भक्तगण सत्संग का श्रवण कर रहे थे।

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