आम आदमी पार्टी ने दावा किया है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) उसके विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रही है। गुरुवार को AAP की ओर से कहा गया कि पार्टी के 40 विधायकों को 20-20 करोड़ रुपये की पेशकश की गई है। AAP की ओर से यहां तक कहा गया कि इसके लिए भाजपा ने 800 करोड़ रुपये अलग से रखे हैं।
इससे पहले आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया था कि भाजपा ने डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को पार्टी तोड़ने का ऑफर दिया था। AAP का दावा है कि सिसोदिया से कहा गया था कि अगर वह पार्टी के विधायकों को तोड़कर भाजपा के साथ आते हैं तो उनके ऊपर चल रहे मामलों को बंद कर दिया जाएगा।
महाराष्ट्र और दिल्ली के समीकरण में काफी अंतर है। महाराष्ट्र में तीन दलों के गठबंधन की सरकार थी। राज्य में 288 विधानसभा सीटें है। इनमें से 106 भाजपा के पास हैं। वहीं, दिल्ली में महज 70 सीटें हैं। इनमें से 62 अकेले AAP के पास हैं। वहीं, भाजपा के पास केवल 8 सीटें हैं। ऐसे में महाराष्ट्र जैसा दलबदल होना दिल्ली में काफी मुश्किल हैं। हालांकि, संख्याबल के लिहाज से देखें तो महाराष्ट्र में जितने विधायकों ने बगावत की उतने विधायकों की बगावत से दिल्ली में सरकार जरूर बदल सकती है।
70 सदस्यों वाली दिल्ली विधानसभा में इस वक्त AAP के 62 विधायक हैं। आठ विधायक भाजपा के हैं। दिल्ली में बहुमत का आंकड़ा 36 का है। यानी, AAP के पास बहुमत के आंकड़े से भी 26 विधायक ज्यादा हैं। राज्य में सत्ता परिवर्तन के लिए महज आठ विधायकों वाली भाजपा को कम से कम 28 विधायकों की जरूरत पड़ेगी।
क्या विधायकों के पाला बदलने से बदल जाएगी सरकार?
28 विधायकों के पाला बदलने पर भी केजरीवाल सरकार गिराना मुश्किल होगा। क्योंकि इन विधायकों पर दलबदल कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है। ऐसे में दूसरा रास्ता विधायकों का इस्तीफा लेने का है। अगर 28 विधायक इस्तीफा देते हैं तो विधानसभा में कुल विधायकों की संख्या घटकर 42 हो जाएगी। ऐसे में बहुमत का आकंड़ा भी घटकर 22 हो जाएगा। इस स्थिति में भी केजरीवाल सरकार के पास बहुमत बना रहेगा।
केजरीवाल सरकार को अल्पमत में लाने के लिए 45 विधायकों के इस्तीफे की जरूरत पड़ेगी। ऐसा होना बहुत मुश्किल है कि इतनी बड़ी संख्या में विधायक एक साथ इस्तीफा दें। वैसे भी अगर 45 विधायक पाला बदलने को तैयार हो जाते हैं तो उन्हें इस्तीफा देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। क्योंकि, इस स्थिति में बागी विधायकों पास पार्टी के दो तिहाई से ज्यादा विधायकों का समर्थन होगा।
AAP 40 विधायकों को तोड़ने की कोशिश का दावा कर रही है, उस स्थिति में क्या?
AAP के दावे के मुताबिक अगर 40 विधायक प्रलोभन में आ भी जाते हैं तो भी पार्टी सत्ता में बनी रहेगी। हां, ये जरूर हो सकता है कि अगर ये सभी विधायक इस्तीफा दे दें और इन सीटों पर नए सिरे से चुनाव हो। चुनाव में अगर भाजपा को 40 में से 28 सीटें भी जीतने में सफल रहती है तो राज्य में सत्ता बदल जाएगी।







