आज से चैत्र नवरात्रि शुरू हो रहे हैं। चैत्र माह की शुक्ल प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना करके देवी दुर्गा की आराधना 9 दिनों तक की जाएगी। इस बार चैत्र नवरात्रि का त्योहार पूरे 9 दिनों का है। मां दुर्गा का पृथ्वी पर आगमन घोड़े पर हुआ है। हिंदू धर्म में नवरात्रि के त्योहार को बहुत ही पवित्र और शुभ फल देने वाला माना गया है। चैत्र नवरात्रि के साथ आज से नया हिंदू विक्रम संवत 2079 भी शुरू हो गया है। चैत्र नवरात्रि पर महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा भी बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है।
आज पूरे देशभर में चैत्र नवरात्रि, प्रतिपदा उत्सव, नव संवत्सर 2079, हिंदू नववर्ष, गुड़ी पड़वा और उगादी का त्योहार बड़े ही धूम-धाम के मनाया जा रहा है। चैत्र नवरात्रि को जहां पूरे देशभर में मनाया जा रहा है तो वहीं गुड़ी पड़वा का त्योहार महाराष्ट्र में हिंदू नव वर्ष के आरंभ की खुशी में मनाया जाता है। हिंदी कैलेंडर के अनुसार चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि नए हिंदू वर्ष का शुरूआत होता है। इसके अलावा उगादी का त्योहार भी आज मनाया जा रहा है। कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, और कोंकड़ में इस दिन को युगादि कहते हैं वहीं तमिलनाडु में इसे उगादी के रूप में मनाया जाता है। राजस्थान में इस तिथि को थापना,कश्मीर में नवरेह और मणिपुर में साजिबु नोंगमा पांबा या मेइतेई चेइराओबा के नाम से मनाया जाता है।
नवरात्रि कलश स्थापना पूजा सामग्री
1. मां दुर्गा की नई मूर्ति
2. चौकी ,वस्त्र और एक आसन
3. एक नई लाल रंग की चुनरी
4. मिट्टी का एक कलश, आम या अशोक की हरी पत्तियां
5. लाल सिंदूर, गुलाब व गुड़हल का फूल और फूलों की माला
6. श्रृंगार की सामग्री
7. दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती और मां दुर्गा आरती की किताबें
8. अक्षत, गंगाजल, शहद, कलावा, चंदन, रोली, जटा नारियल
9. गाय का घी, धूप, अगरबत्ती, पान का पत्ता, सुपारी, लौंग, इलायची, कपूर, अगरबत्ती
10. दीपक, बत्ती के लिए रुई, केसर, नैवेद्य, पंचमेवा, गुग्गल, लोबान, जौ, फल, मिठाई, उप्पलें
11. एक हवन कुंड, हवन की सामग्री और आम की सूखी लकड़ियां
आज से चैत्र नवरात्रि आरंभ गए हैं। इस बार पूरे 9 दिनों तक देवी दुर्गा की आराधना होगा। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करके देवी उपासना और पाठ शुरू हो जाते हैं। नवरात्रि पर देवी नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधिवत पूजा करने की परंपरा है। नवरात्रि के नौ दिनों तक दुर्गा सप्तशती पाठ करने का विशेष महत्व होता है। ऐसी मान्यता है नवरात्रि पर दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से सभी तरह सुख और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
सप्तशती में कुल 13 अध्याय हैं जिन्हें तीन चरित्र यानी हिस्सों में बांटा गया है। प्रथम चरित्र में मधु कैटभ वध की कथा है। मध्य चरित्र में सेना सहित महिषासुर के वध की कथा है और उत्तर चरित्र में शुम्भ निशुम्भ वध और सुरथ एवं वैश्य को मिले देवी के वरदान की कथा है। हर अध्याय के पाठ का अलग-अलग फल मिलता है। अलग-अलग मनोकामना के अनुसार दुर्गा सप्तशती पाठ करना चाहिए।
प्रथम अध्याय के पाठ से चिंताओं से मुक्ति मिलती है और मन प्रसन्न रहता है। दूसरे अध्याय के पाठ से कोर्ट केस और विवादों में विजय प्राप्त होती है। दुर्गा सप्तशती के तीसरे पाठ से शत्रुओं और विरोधियों से छुटकारा मिलता है। मां दुर्गा की भक्ति और कृपा दृष्टि के लिए चौथे अध्याय का पाठ करना लाभदायक होता है। पांचवें अध्याय के पाठ से देवी की असीम अनुकंपा प्राप्त होती है। छठे अध्याय के पाठ से भय, शंका, ऊपरी बाधा से मुक्ति मिलती है।
विशेष मनोकामना पूर्ण करने के लिए सातवें अध्याय का पाठ करें। इस अध्याय में देवी द्वार चंड मुंड के वध की कथा है। मनचाहा साथी पाने के लिए आठवें अध्याय का पाठ करें। इस अध्याय में रक्तबीज के वध की कथा है। नवें अध्याय का पाठ खोए हुए व्यक्ति को वापस लाने के लिए और संतान सुख के लिए कारगर माना गया है। इस अध्याय में निशुंभ के वध की कथा है। दसवें अध्याय का पाठ करने से में शुंभ वध की कथा है। इस अध्याय के पाठ से रोग, शोक का नाश होता है। ग्यारहवें अध्याय के पाठ से व्यापार में लाभ एवं सुख शांति की प्राप्ति होती है। बारहवें अध्याय के पाठ से मान-सम्मान एवं सुख संपत्ति का लाभ मिलता है। तेरहवें अध्याय के पाठ से देवी की भक्ति एवं कृपा दृष्टि प्राप्त होती है।
नवरात्रि पर कलश स्थापना के नियम
वास्तुशास्त्र के अनुसार,उत्तर और उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को पूजा के लिए सर्वोत्तम स्थान माना गया है।
– शास्त्रों में नवरात्रि के पर्व पर कलश पर नारियल रखने के लिए नियम बताया गया है जिसके अनुसार कलश पर नारियल रखते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि नारियल का मुख नीचे की तरफ न हो। नारियल का मुख पूजन करने वाले व्यक्ति की ओर हो।
– नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना अर्थात घटस्थापना के साथ ही अपने कुल देवी देवता की पूजा के साथ-साथ नवरात्रि की पूजा की शुरुआत करनी चाहिए।
– नवरात्रि पर दुर्गा जी की पूजा में कभी भी भूलकर दूर्वा,तुलसी,आंवला, आक और मदार के फूल अर्पित नहीं करना चाहिए। देवी का पूजा आराधना में हमेशा लाल रंग के फूलों व रंगों का ज्यादा प्रयोग करें।
– ज्योतिष के अनुसार चैत्र नवरात्रि में प्रतिपदा की सुबह द्वि-स्वभाव लग्न मीन होता है ऐसे में इस अवधि में भी घटस्थापना करना शुभ माना गया है।
नवरात्रि पर शुभ योग
इस बार तिथियों के क्षय न होने के कारण नवरात्रि का त्योहार पूरे 9 दिनों का है। ऐसे में देवी दुर्गा के भक्तों को पूरे 9 दिनों तक मां दुर्गा का साधना और आराधना का मौका मिलेगा। इस बार चैत्र नवरात्रि पर बहुत ही शुभ योग में मनाया जा रहा है। चैत्र नवरात्रि की शुरुआत रेवती नक्षत्र में होना बहुत ही शुभ माना गया है। इसके अलावा पूरे 9 दिनों तक कई तरह के शुभ योग बनेंगे। जिसमे मुख्य शुभ योग इस प्रकार है- सर्वार्थसिद्धि, पुष्य नक्षत्र, बुधादित्य, शोभन और रवि योग। नवरात्रि पर शुभ कार्य और खरीदारी करने का विशेष महत्व होता है।









