8 नवंबर को देशभर में दीपावली का पर्व मनाया जा रहा है। यह त्योहार माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि इस दिन शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से घर में सुख-समृद्धि, खुशहाली और सकारात्मकता का आगमन होता है। ऐसे में पूजा से पहले सामग्री जुटाना और सही विधि जानना जरूरी है।
दीपावली में कैसे पाएं सुख, शांति समृद्धि
- मां लक्ष्मी ऐश्वर्य व वैभव की देवी हैं, इसीलिए दीपावली के दिन इनकी पूजा से भौतिक सुखों की प्राप्ति तो होती ही है साथ ही घर में भरपूर खुशियां आती हैं। वहीं दीवाली पूजन में अगर कुछ बातों का भी खास ध्यान रखा जाए तो विशेष कृपा प्राप्त की जा सकती है ।
- धार्मिक मान्यताओं में आम के पेड़ को दैवीय वृक्ष माना जाता है और आम के पेड़ की लकड़ी और पत्तों का प्रयोग सभी प्रकार के धार्मिक कार्यों की शुरुआत करने से पहले किया जाता है। दीपावली पर भी आपको घर के मुख्य द्वार और पूजाघर के मुख्य द्वार पर गेंदे के फूल और आम के पत्तों से बना तोरण लगाना चाहिए। ऐसा करना धार्मिक दृष्टि तो शुभ माना ही जाता है, बल्कि वास्तु के अनुसार भी यह सकारात्मक उर्जा को आकर्षित करता है।
- धर्म से जुड़े कोई भी शुभ कार्य आरंभ करने से पहले स्वास्तिक का चिह्न अवश्य बनाया जाता है। इसका महत्व बहुत खास माना जाता है। दीपावली के दिन पूजाघर की दीवारों पर सिंदूर से स्वास्तिक चिह्न बनाएं इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह देवी लक्ष्मी को आकर्षित करता है और घर में सुख समृद्धि की वृद्धि होती है।
दिवाली पर प्रदोष काल और स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजन का महत्व
हर वर्ष कार्तिक अमावस्या पर देवी लक्ष्मी की पूजा का महत्व होता है। इस दिन माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, देवी सरस्वती और भगवान कुबेर की पूजा होती है। शास्त्रों में दिवाली पर लक्ष्मी पूजन अमावस्या तिथि और प्रदोष काल में सबसे उपयुक्त और शुभ मानी जाती है। प्रदोष काल और स्थिर लग्न में मां लक्ष्मी की पूजा करने से माता जल्दी प्रसन्न होती हैं और अंश रूप में वास करने लगती हैं। इससे अलावा दिवाली पर महानिशिता काल में लक्ष्मी पूजन का महत्व है।
दिवाली पर दीपक जलाने के पीछे छिपा है खास संदेश
दीपक की छोटी-सी लौ भी अंधेरे में उजाला फैलाने की क्षमता रखती है। इसका आध्यात्मिक संदेश है कि जीवन में मुश्किलें कितनी भी हों, उम्मीद और ज्ञान का प्रकाश हमेशा बनाए रखना चाहिए। दीपावली पर दीपक जलाने की परंपरा भी इसी विचार को दर्शाती है। हालांकि, अखंड दीपक जलाते समय सुरक्षा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। इसे समतल और सुरक्षित जगह पर रखें तथा पर्दों, कागज और अन्य ज्वलनशील चीजों से दूर रखें। दीपक को बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से भी दूर रखना चाहिए।
मां लक्ष्मी की पूजा से क्या है दीपक का संबंध?
दीपावली की रात मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन दीपों से सजे घर में मां लक्ष्मी का स्वागत होता है। भक्त मुख्य द्वार, आंगन और पूजा स्थल पर दीपक जलाकर अपने घर को प्रकाशमय बनाते हैं। धार्मिक दृष्टि से दीपक की रोशनी समृद्धि, खुशहाली और शुभता का प्रतीक मानी जाती है। यही कारण है कि लक्ष्मी पूजन में दीप प्रज्वलित करने को विशेष महत्व दिया जाता है।
लक्ष्मी पूजा के दिन किन गलतियों से बचना चाहिए?
- पूजा स्थल और घर को गंदा या अव्यवस्थित न रखें। पूजन से पहले साफ-सफाई कर लें।
- खंडित या टूटी हुई मूर्तियों को नियमित पूजा में स्थापित करने से बचें।
- पूजा के दौरान मन में क्रोध, ईर्ष्या और नकारात्मक विचार न लाएं।
- देवी-देवताओं को बासी फूल और खराब भोग अर्पित न करें।
- पूजा के समय जल्दबाजी न करें और बीच में बार-बार उठने से बचें।
- मां लक्ष्मी की आराधना के साथ भगवान गणेश का पूजन करना न भूलें।
- दीपक जलाते समय सुरक्षा का ध्यान रखें। उन्हें पर्दों और ज्वलनशील वस्तुओं के पास न रखें।
- पूजा के बाद प्रसाद का अपमान न करें और परिवार के सदस्यों में श्रद्धापूर्वक वितरित करें।
लक्ष्मी पूजा में सबसे पहले किसकी पूजा करनी चाहिए?
हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से करने का विधान है। उन्हें प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता कहा जाता है। इसलिए दीपावली पर भी सबसे पहले भगवान गणेश का आवाहन और पूजन करना चाहिए। इसके बाद मां लक्ष्मी की आराधना करें। मान्यता है कि गणेश जी की पूजा करने से कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और मां लक्ष्मी की कृपा से धन-धान्य तथा वैभव की प्राप्ति होती है।







