चुनाव आयोग ने एक बार फिर अपने भीतर किसी तरह के मतभेद या विवाद होने की खबरों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि उसके सभी फैसले आपसी सहमति से लिए गए हैं और कामकाज में किसी तरह की असहमति नहीं है। आयोग ने स्पष्ट किया कि कैबिनेट सचिव को दो चुनाव आयुक्तों की ओर से जुलाई में लिखे गए पत्र किसी नीतिगत मुद्दे या आईटी विभाग से जुड़े अधिकारों को लेकर नहीं थे, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के कामकाज और उनके जारी किए गए आदेश से संबंधित थे।
28 जुलाई के आदेश से शुरू हुआ था विवाद
आयोग के मुताबिक, 28 जुलाई 2026 को प्रतिनियुक्ति पर आए अतिरिक्त सचिव स्तर के आईएएस अधिकारी मनीष गर्ग ने काम के बंटवारे को लेकर एक कार्यालय आदेश जारी किया था। इस आदेश के तहत आईटी और जन शिकायत निवारण प्रणाली (पीजीआरएस) का प्रभार उप चुनाव आयुक्त संजय कुमार से लेकर आईटी महानिदेशक सीमा खन्ना को सौंप दिया गया था। इसके बाद सीमा खन्ना सीधे आयोग के प्रति जवाबदेह हो गई थीं।
इस आदेश पर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आपत्ति जताई। दोनों ने 29 जुलाई को कैबिनेट सचिव को अलग-अलग पत्र लिखकर अधिकारी के आदेश और उनके व्यवहार पर सवाल उठाए। हालांकि, आयोग ने साफ किया कि इन पत्रों में किसी नीतिगत विषय या आईटी विभाग की निगरानी के अधिकार को लेकर शिकायत नहीं की गई थी।
दोनों आयुक्तों के निर्देश के बाद लागू नहीं हुआ आदेश
मामले में 30 जुलाई 2026 को दोनों चुनाव आयुक्तों ने मिलकर निर्देश जारी किया। इसके बाद 28 जुलाई को जारी कार्य आवंटन का आदेश लागू नहीं हुआ। आयोग ने स्पष्ट किया कि आईटी विभाग की निगरानी का अधिकार कभी किसी से वापस नहीं लिया गया था। साथ ही, दोनों आयुक्तों की ओर से उठाए गए मुद्दों का समाधान हो चुका है और अब इस मामले में किसी विवाद की गुंजाइश नहीं है।
संजय कुमार की वापसी के बाद फिर हुआ कार्य आवंटन
इस घटनाक्रम के बाद संजय कुमार को उनके मूल कैडर में वापस भेज दिया गया। वहीं, आईटी महानिदेशक सीमा खन्ना को पहले की तरह फाइलें भेजने के लिए कहा गया था, लेकिन उस समय इस संबंध में कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुआ था। करीब एक महीने बाद आयोग में नए उप चुनाव आयुक्त पवन कुमार शर्मा की नियुक्ति हुई। उनके आने के बाद महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का नए सिरे से आवंटन किया गया और इस संबंध में लिखित आदेश भी जारी कर दिए गए।
नई व्यवस्था के तहत अब सीमा खन्ना अपनी फाइलें उप चुनाव आयुक्त पवन कुमार शर्मा के माध्यम से आयोग को भेजेंगी। हालांकि, उनकी रिपोर्टिंग संरचना में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वह पहले की तरह उप चुनाव आयुक्त (डीईसी) स्तर के अधिकारी को ही रिपोर्ट करती रहेंगी। इस तरह आयोग में फाइलों के आवागमन और कार्य आवंटन की पुरानी व्यवस्था फिर बहाल हो गई है।
23 सितंबर 2025 के आदेश के मुताबिक चल रहा काम
गौरतलब है कि 23 सितंबर 2025 को जारी कार्यालय आदेश के तहत आयोग में आईटी, जन शिकायत और मतदाता सूचियों से संबंधित महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां उप चुनाव आयुक्त संजय कुमार को सौंपी गई थीं। उस व्यवस्था में आयोग की आईटी महानिदेशक सीमा खन्ना, जो आयोग की वेबसाइट ईसीआईनेट की प्रभारी भी हैं, अपनी फाइलें संजय कुमार के माध्यम से आयोग को भेजती थीं।
28 जुलाई 2026 के आदेश के जरिए इस व्यवस्था में बदलाव करने की कोशिश की गई थी, लेकिन दोनों चुनाव आयुक्तों के हस्तक्षेप के बाद यह आदेश लागू नहीं हो सका। आयोग का कहना है कि फिलहाल कामकाज 23 सितंबर 2025 को जारी आदेश के अनुरूप ही चल रहा है। न तो कार्य आवंटन की मूल व्यवस्था बदली है और न ही आईटी विभाग की निगरानी से जुड़े अधिकारों में कोई परिवर्तन किया गया है।
विपक्ष ने उठाए थे सवाल, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग
चुनाव आयोग के भीतर मतभेद और असहमति की खबरें सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में भी मामला गरमा गया था। विपक्ष ने इन खबरों का हवाला देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की थी। आयोग में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से कैबिनेट सचिव को पत्र लिखे जाने की खबरों को भी विपक्ष ने मुद्दा बनाया था।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि दोनों आयुक्तों की ओर से उठाए गए मुद्दे एक अधिकारी के कार्य आवंटन आदेश से जुड़े थे, न कि आयोग की नीतियों या किसी विभाग के अधिकारों को लेकर। आयोग के अनुसार, संबंधित आदेश लागू नहीं हुआ और मामले का समाधान भी हो चुका है। सभी महत्वपूर्ण फैसले आपसी सहमति से लिए जा रहे हैं तथा आयोग का कामकाज सामान्य रूप से जारी है।






