दिवाली के बाद साबुन, बिस्किट, नूडल्स, डिटर्जेंट और खाने-पीने के पैकेटबंद सामान महंगे हो सकते हैं। कच्चे माल की लगातार बढ़ती लागत के बीच हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल), ब्रिटानिया, डाबर और टाटा कंज्यूमर जैसी कंपनियां कीमतें बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। कुछ कंपनियां दिसंबर से चुनिंदा उत्पादों के दाम बढ़ा सकती हैं।
ब्रिटानिया, एचयूएल, डाबर और गोदरेज कंज्यूमर ने जून तिमाही में ही करीब 2 से 5% तक कीमतें बढ़ाई थीं। सितंबर तिमाही के लिए भी बढ़ोतरी पर विचार किया गया। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने जून से सितंबर के बीच चाय की कीमतें 8 से 10% तक बढ़ाईं। कंपनी ने 30 रुपये वाले नमक के पैकेट की कीमत मई में 32 रुपये और फिर अक्तूबर में 34 रुपये कर दी।
पैकेजिंग की लागत में बढ़ोतरी भी कंपनियों की मुश्किलें बढ़ा रही है। प्लास्टिक पैकेजिंग 40 प्रतिशत तक महंगी हो चुकी है, जिससे उत्पादों की कुल लागत पर दबाव बढ़ रहा है।
कम आय वाले परिवारों पर पड़ेगा ज्यादा असर
विशेषज्ञों के मुताबिक, कम आय वाले परिवारों पर महंगाई का असर ज्यादा पड़ता है, क्योंकि उनके बजट का बड़ा हिस्सा रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च होता है। बिस्किट, नूडल्स, साबुन, डिटर्जेंट और खाद्य तेल जैसे सस्ते उत्पादों की कीमतों में थोड़ा बदलाव भी खरीदारी को प्रभावित कर सकता है।
डेटम इंटेलिजेंस के संस्थापक सतीश मीणा के मुताबिक, कंपनियां कुछ समय तक बढ़ी लागत खुद उठाती हैं, लेकिन बाद में ग्राहकों पर इसका बोझ डालते हुए दाम बढ़ा सकती हैं।






