मेघालय में भाजपा ने अब सरकार में एक और मंत्री पद की मांग उठाई है। पार्टी का कहना है कि सत्ताधारी गठबंधन में अब उसके 10 विधायक हैं और वह दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है। ऐसे में उसे मंत्रिमंडल में पहले से ज्यादा जगह मिलनी चाहिए। राज्य के पशुपालन एवं पशु चिकित्सा मंत्री सनबोर शुल्लई ने बुधवार को कहा कि भाजपा के सभी विधायक मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा से मुलाकात कर अपनी मांग रखेंगे।
सनबोर शुल्लई ने कहा कि भाजपा को एनपीपी के किसी विधायक को मंत्री बनाए जाने से कोई परेशानी नहीं है। लेकिन जब गठबंधन में भाजपा दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है, तो उसे भी उचित सम्मान और प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। फिलहाल राज्य मंत्रिमंडल में भाजपा के दो मंत्री हैं। इनमें से एक पहले यूडीपी में थे और बाद में भाजपा में शामिल हुए थे।
शुल्लई ने कहा कि साल 2023 से भाजपा लगातार एनपीपी के साथ खड़ी रही है। उस समय भी पार्टी ने NPP का साथ नहीं छोड़ा, जब दूसरे दल मिलकर उसके बिना सरकार बनाने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भाजपा ने राजनीतिक मुश्किलों के दौरान गठबंधन का साथ दिया है। ऐसे में अब पार्टी के विधायकों को मंत्रिमंडल में उचित जगह मिलनी चाहिए।
कैबिनेट फेरबदल से पहले भाजपा से नहीं ली गई राय
शुल्लई ने आरोप लगाया कि हाल ही में मंत्रिमंडल में फेरबदल और विभागों के बंटवारे से पहले एनपीपी ने अपने सहयोगी दल भाजपा से कोई चर्चा नहीं की। उनका कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में भाजपा को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने कहा कि मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस (एमडीए) सरकार को भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से लगातार सहयोग मिलता रहा है, लेकिन इसके बावजूद भाजपा विधायकों को उचित महत्व नहीं दिया जाना गठबंधन के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचा मामला
शुल्लई ने बताया कि बुधवार को भाजपा विधायकों ने पार्टी के पूर्वोत्तर सह-प्रभारी राजीव बब्बर से मुलाकात की। इस दौरान उन्हें राज्य के राजनीतिक हालात, मंत्रिमंडल में फेरबदल और विभागों के बंटवारे को लेकर पार्टी की नाराजगी से अवगत कराया गया। उन्होंने कहा कि इस मामले पर दिल्ली में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से भी बातचीत की जाएगी। इसके बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा।
भाजपा नेता ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा और दोनों उपमुख्यमंत्रियों से भी मुलाकात की है। उनसे अनुरोध किया गया है कि भाजपा के सभी विधायकों के साथ एक बैठक बुलाई जाए, ताकि आपसी बातचीत से इस मुद्दे का हल निकाला जा सके। पार्टी चाहती है कि गठबंधन में उसे उसकी मौजूदा ताकत के हिसाब से प्रतिनिधित्व मिले।






