क्यूबा पर अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिका और क्यूबा के अधिकारियों के बीच तीखी बहस हो गई। विवाद उस समय बढ़ गया, जब अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज प्रतिबंधों के खिलाफ प्रस्ताव का विरोध करने के लिए अपना पक्ष रख रहे थे। इसी दौरान क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज ने उन्हें झूठा कह दिया।
यह घटना अमेरिका और क्यूबा के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन क्यूबा की राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव के लिए आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
क्यूबा पहले से ही आर्थिक और वित्तीय संकट का सामना कर रहा है। जनवरी के अंत में ट्रंप ने उन देशों पर शुल्क लगाने की चेतावनी दी थी, जो क्यूबा को तेल बेचते हैं या उसकी आपूर्ति करते हैं। इस कदम के बाद द्वीपीय देश में ईंधन की उपलब्धता प्रभावित हुई है। ईंधन की कमी के कारण वहां बड़े पैमाने पर बिजली कटौती हो रही है। इसका असर खाना पकाने, पानी की आपूर्ति, इंटरनेट और टेलीफोन जैसी बुनियादी सेवाओं पर भी पड़ा है।
प्रतिबंधों के खिलाफ प्रस्ताव पर बुधवार को मतदान
अमेरिकी अधिकारी संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों को क्यूबा पर अमेरिकी प्रतिबंधों की निंदा करने वाले वार्षिक प्रस्ताव के खिलाफ मतदान करने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह प्रस्ताव अमेरिका की ‘अधिकतम दबाव’ की नीति की आलोचना करता है।
पिछले सप्ताह भी माइक वॉल्ट्ज और क्यूबा के प्रतिनिधि अर्नेस्टो सोबेरोन गुजमान के बीच एक अमेरिकी कार्यक्रम के बाहर तीखी बहस हुई थी। उस कार्यक्रम में क्यूबा के असंतुष्टों और पूर्व कैदियों को शामिल किया गया था, ताकि वहां की सरकार पर दमनकारी व्यवहार के आरोपों को सामने रखा जा सके।
क्यूबा पर अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों की निंदा करने वाले प्रस्ताव को पिछले 34 वर्षों से संयुक्त राष्ट्र में व्यापक समर्थन मिलता रहा है। पिछले साल मतदान में 165 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में, सात ने विरोध में वोट दिया था, जबकि 12 देश मतदान से दूर रहे थे। अर्जेंटीना, यूक्रेन और हंगरी ने पहली बार प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया था।






