जिस चीन से भारत हर साल 130 अरब डॉलर से ज्यादा का सामान खरीदता है और जिसके साथ व्यापार घाटा 100 अरब डॉलर के करीब पहुंच चुका है, उसी चीन को अब भारत अपना बड़ा बाजार बनाने के लिए कमर कस रहा है।
गोयल ने कहा, भारतीय प्रतिभा को विदेश ले जाने के बदले काम को ही भारत भेजना कोविड के समय की सीख है। युवाओं की कमी झेल रहे देश समझ गए हैं कि भारत में काम भेजना सस्ता भी है और कारगर भी। भारत को इसका दोहरा फायदा है, विदेशी मुद्रा की कमाई बढ़ती है। यहां काम करने वाले विदेश में अकेले रहने के बजाय अपने परिवार के साथ रहते हैं। इसलिए जितने ज्यादा वैश्विक क्षमता केंद्र भारत आएं, उतना बेहतर।
पुराने समझौतों से सबक
गोयल ने कहा कि पहले के समझौतों में शायद उद्योग और हितधारकों से उतनी सलाह नहीं हुई, जिससे संवेदनशील क्षेत्र सुरक्षित रहें और भारत के आक्रामक हित पूरे हों। इसीलिए उद्योग जगत में उन पुराने समझौतों को लेकर आज अच्छी भावना नहीं दिखती। अब बड़े पैमाने पर परामर्श होता है और समझौते के बाद बड़े प्रतिनिधिमंडल भेजकर मौके खोले जाते हैं। पिछले तीन साल में व्यापार वार्ता के लिए बाकायदा नियमावली तैयार की गई है और हर समझौते का दस्तावेजीकरण होता है, ताकि अधिकारी बदलें तो भी सीख न खोए।
चिली के साथ भी होने को है समझौता
- चीन के साथ गोयल ने आगे के व्यापार समझौतों का पूरा पत्ता भी खोल दिया। अमेरिका के अलावा आठ नए समझौतों की कतार पर उन्होंने कहा कि चिली के साथ समझौता पूरा होने को है और कनाडा से वार्ता अच्छी तरह आगे बढ़ रही है। मेक्सिको जल्द शुरुआती समझौता चाहता है। दक्षिण अफ्रीका की अगुवाई वाले दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ यानी साकू के साथ वार्ता अभी शुरू हुई है, इसलिए उसमें वक्त लगेगा। बोत्सवाना, इस्वातिनी, लेसोथो, नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका वाले इस समूह के साथ भारत ने अगस्त में तरजीही व्यापार समझौते की औपचारिक बातचीत की शर्तों पर दस्तखत किए थे।
- दक्षिण अमेरिकी व्यापार समूह मर्कोसुर के साथ मौजूदा तरजीही व्यापार समझौते के विस्तार की बातचीत चुनाव संपन्न होने और सरकार की निरंतरता के बाद तेज हो सकती है। खाड़ी सहयोग परिषद के साथ बातचीत, जिससे खाड़ी के चार और देश जुड़ेंगे, और इस्राइल के साथ बातचीत में पश्चिम एशिया संकट के कारण वक्त लग सकता है, हालांकि भारत रफ्तार बढ़ाने को तैयार है।






