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प्रदेश में चिकित्सकीय लापरवाही के मामले में अब पुलिस सीधे आरोपी डॉक्टर को गिरफ्तार नहीं कर सकेगी। इसके लिए पहले जिला और प्रदेश स्तरीय मेडिकल बोर्ड जांच करेगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। इस संबंध में शासन की ओर से चिकित्सकीय लापरवाही की शिकायतों के निस्तारण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की गई है। इसे सभी डीएम व सीएमओ को भेजा गया है।
शासन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि चिकित्सकीय लापरवाही से जुड़े प्रकरण के लिए जिला स्तरीय बोर्ड का गठन किया जाए। इसकी प्रदेश स्तरीय सुनवाई के लिए राज्य मेडिकल बोर्ड बनेगा। शिकायत को डीएम द्वारा सीएमओ को भेजा जाएगा और बोर्ड तीन दिन में रिपोर्ट देगी। राज्यस्तरीय बोर्ड के अध्यक्ष चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशक होंगे। डीजीएमई द्वारा नामित फॉरेंसिक मेडिसिन प्रोफेसर, केजीएमयू, एसजीपीजीआई और लोहिया संस्थान और अन्य मेडिकल कॉलेजों से दो प्रोफेसर, एक एनएमसी प्रतिनिधि, चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग से नामित विधि अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल होंगे। स्वास्थ्य महानिदेशक से संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी सदस्य सचिव होंगे।
बदलेगी जांच की प्रक्रिया
हाईकोर्ट ने दिया था एसओपी जारी करने का निर्देश : पांच मई 2026 को जारी एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक देश में वर्ष 2022 में चिकित्सकीय लापरवाही के 118 केस दर्ज हुए थे। 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 869 तक पहुंच गया है। इसमें उत्तर प्रदेश पहले नंबर पर है। यहां 458 मामले (52.70%) दर्ज किए गए। पिछले दिनों हाईकोर्ट ने चिकित्सकीय लापरवाही से जुड़े मामले में एसओपी जारी करने का निर्देश दिया था।