यमुना में फिर मृत मिलीं मछलियां, दिल्ली के पानी में रासायनिक कचरे से लेकर ऑक्सीजन की कमी तक की आशंका

उत्तर दिल्ली के बुराड़ी के पास यमुना नदी में बड़ी संख्या में मछलियां मृत मिलने से नदी की सेहत और जलीय जैव विविधता पर खतरा फिर उजागर हुआ है। बुधवार शाम नदी किनारे मरी हुईं मछलियों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जलस्तर सामान्य होने के बावजूद मछलियों की सामूहिक मौत से प्रदूषण की आशंका फिर गहरा गई है। विशेषज्ञों ने औद्योगिक रासायनिक कचरे से लेकर पानी में घुलित ऑक्सीजन (डीओ) की कमी तक को इसकी संभावित वजह बताया है।

हालांकि, मछलियों की मौत का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं है। इसकी पुष्टि के लिए पानी के नमूनों की वैज्ञानिक जांच जरूरी है। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई कि हरियाणा की ओर से यमुना में पहुंच रहे रासायनिक प्रदूषकों के कारण मछलियों की मौत हुई होगी। उत्तर प्रदेश के बागपत क्षेत्र में भी मछलियों के मृत मिलने की खबरों ने चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच कोई संबंध है या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
रासायनिक कचरे से दूषित हुआ पानी?
न्यू दिल्ली नेचर सोसाइटी के संस्थापक वेरेहन खन्ना के मुताबिक, फिलहाल मछलियों की मौत की वजह सामने नहीं आई है। आशंका है कि हरियाणा की ओर से किसी नाले या ड्रेन के जरिये रासायनिक कचरा नदी में पहुंचा हो। उन्होंने 12 अक्तूबर को हुई अम्लीय वर्षा और मछलियों की मौत के बीच संभावित संबंध की भी जांच करने की जरूरत बताई। इन आशंकाओं की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक प्रमाण जरूरी हैं। इसके लिए पानी में रासायनिक प्रदूषकों और जल गुणवत्ता से जुड़े अन्य मानकों की जांच करनी होगी।
ऑक्सीजन की कमी भी बन सकती है वजह
पर्यावरणविद् फैयाज खुदसर के मुताबिक, बीते कुछ दिनों से बादल छाए रहने के कारण धूप कम निकल रही है और रात के तापमान में गिरावट आ रही है। ऐसे में पानी में घुलित ऑक्सीजन का स्तर प्रभावित होने की आशंका है। ऑक्सीजन कम होने पर मछलियों समेत अन्य जलीय जीवों का जीवित रहना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, बुराड़ी में वास्तव में ऐसी स्थिति बनी थी या मछलियों की मौत के पीछे कोई अन्य कारण था, इसका पता घुलित ऑक्सीजन (डीओ) के स्तर और अन्य वैज्ञानिक मानकों की जांच से ही चलेगा।

पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी घटनाएं
बुराड़ी के पास यमुना में मछलियों के मृत मिलने का यह पहला मामला नहीं है। पिछले साल मई में भी ऐसी घटना सामने आई थी। उस समय स्थानीय लोगों ने हरियाणा की ओर से कथित तौर पर रासायनिक कचरा छोड़े जाने की आशंका जताई थी। अब दोबारा ऐसी घटना सामने आने से नदी में प्रदूषण की निगरानी और जलीय जीवों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

जलीय जीवन पर संकट
पर्यावरणविद् भीम सिंह के मुताबिक, वजीराबाद से ऊपर यमुना का हिस्सा अपेक्षाकृत साफ माना जाता है। ऐसे में यहां बार-बार मछलियों का मरना चिंताजनक है। उनका कहना है कि हथिनीकुंड बैराज से औसतन करीब 300 क्यूसेक पानी प्रति घंटे आने के बावजूद यमुना में पर्यावरणीय प्रवाह केवल 10 क्यूसेक तक सीमित है। इसके अलावा, करनाल, पानीपत और सोनीपत क्षेत्रों से आने वाले धनौरा नाले तथा नाला नंबर 2 और 8 के जरिये अशोधित गंदा पानी नदी में पहुंच रहा है। भीम सिंह ने औद्योगिक प्रदूषण को भी मछलियों की मौत की संभावित वजह बताया। हालांकि, इसके लिए जिम्मेदार प्रदूषकों और उनके स्रोतों की पहचान जांच के बाद ही हो सकेगी।
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