राजधानी लखनऊ में बिजली उपकेंद्रों पर उपभोक्ताओं की शिकायतें दूर करने वाले संविदाकर्मियों की संख्या करीब 30 फीसदी घटा दी गई है, जबकि हर साल करीब 15 फीसदी उपभोक्ता बढ़ रहे हैं। पहले चार कर्मचारियों के गैंग से होने वाला काम अब तीन कर्मियों से कराया जा रहा है। आरोप है कि कई उपकेंद्रों पर 11 और 33 हजार वोल्ट की लाइनों के खंभों पर बिना पर्याप्त प्रशिक्षण और अनुभव के कर्मियों को चढ़ाया जा रहा है। इससे हादसों का खतरा बढ़ गया है।
वेतन रोकने की धमकी भी दी जाती
शिकायतों का बोझ बढ़ने के बावजूद कर्मचारियों की संख्या घटा दी गई है। खालिद का आरोप है कि शिकायतों का दबाव बढ़ने पर जेई और एसडीओ संविदाकर्मियों से आठ की जगह 12 घंटे तक काम करा रहे हैं। नौकरी से निकालने और वेतन रोकने की धमकी भी दी जाती है।
कई हादसे, फिर भी नहीं बदली व्यवस्था
- फरवरी में कल्याणपुर में परशुराम रावत की मौत।
- अप्रैल में दुबग्गा उपकेंद्र पर सुहैल करंट से झुलसा।
- मई में मोहनलालगंज ओल्ड उपकेंद्र में महानंद झुलसे।
- सितंबर में चिनहट शिवपुरी उपकेंद्र के रंजीत कुमार की मौत।
- अक्टूबर में आशियाना उपकेंद्र के संविदा लाइनमैन अभिषेक झुलसे।
पारिश्रमिक : अकुशल संविदाकर्मी 11,200 रुपये और कुशल संविदाकर्मी 14,100 रुपये।
वर्टिकल में कर्मियों का शोषण बढ़ा है। प्रबंधन ने उपकेंद्र कर्मियों की संख्या करीब 30 फीसदी घटाकर उपभोक्ताओं की समस्याएं बढ़ा दी हैं। कुछ उपकेंद्रों पर जेई कर्मचारियों से आठ की जगह 12 घंटे तक काम करा रहे हैं। -देवेंद्र कुमार पांडेय, प्रदेश महामंत्री, संविदा/आउटसोर्स यूनियन







