आए दिन आबादी क्षेत्र में आ रहे हाथी अब हमारे पड़ोसी हो चुके हैं, शायद यह वन विभाग की ओर से भी मान लिया गया है, इसलिए बच्चों के बीच हमारे पड़ोसी हाथी जैसे विषयों पर वन विभाग की ओर से जिला स्तरीय प्रतियोगिता कराई जा रही है। सबसे अच्छी चित्रकला कागजों पर उकेरने वाले बच्चों को विभाग की ओर से पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया जाएगा।
दरअसल, वन्य जीवों के प्रति जागरूकता और संरक्षण के लिए वन विभाग की ओर से हर साल जागरूकता अभियान चलाया जाता है। इसमें स्कूलों में जाकर बच्चों को वन जीवों की रक्षा और संरक्षण के लिए प्रेरित किया जाता है, लेकिन इस वर्ष वन विभाग की ओर से अनूठी पहल करते हुए जिला स्तरीय प्रतियोगिता कराई जा रही है, जो दो वर्गों में कराई जा रही है।
सरकारी और निजी सभी स्कूल प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर सकेंगे
पहले वर्ग में कक्षा छह से आठ तक के बच्चे और दूसरे वर्ग में कक्षा नौ से दस तक के बच्चे हिस्सा लेंगे। प्रत्येक वर्ग में तीन विषयों में से किसी एक पर चित्रकला तैयार की जाएगी। एक वर्ग से स्कूल की ओर से दो-दो विद्यार्थियों (कुल चार बच्चों) की चित्रकलाएं भेजी जा सकेंगी। सरकारी और निजी सभी स्कूल प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर सकेंगे।
ये है पुरस्कार राशि:-
कक्षा छह से आठ तक के वर्ग में प्रथम पुरस्कार 4000, द्वितीय 3000 और तृतीय 2000 रुपये है, जबकि कक्षा नौ से दस तक में प्रथम पुरस्कार 6000, द्वितीय 4000 और तृतीय पुरस्कार 2000 रुपये दिया जाएगा।
ये हैं चित्रकला के विषय:-
कक्षा छह से आठ तक के विषय
हमारे पड़ोसी हाथी
एक तेंदुए का दिन
झिलमिल झील के बारहसिंघा
कक्षा 9 से 10 तक के विषय:
मानव वन्यजीव सह-अस्तित्व
गंगा और वन्यजीव
बाघ, हिरण और वन का संबंध
छात्र-छात्राएं ही कल के भारत का भविष्य हैं, इसलिए इन्हें वन्य जीवों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए प्रेरित किया जाना जरूरी है, ताकि यह अच्छे ढंग से वन्य जीवों को समझ सकें। प्रतियोगिता से बच्चों की जिज्ञासाएं बढ़ेंगी और वह वन्य जीवों के प्रति दयालु बनेंगे। स्कूलों से अपील की जाती है कि वह अधिक से अधिक संख्या में चित्रकला प्रतियोगिता में हिस्सा लें। – पूनम कैंथोला, उप वन संरक्षक, हरिद्वार वन प्रभाग







