टिहरी जिला विकास प्राधिकरण में एक व्यावसायिक भवन का मनचाहा निर्माण कराने के लिए स्वीकृत नक्शा बदलकर उसकी जगह फर्जी नक्शा ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री कार्यालय की गोपनीय जांच में यह फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद प्राधिकरण में हड़कंप मच गया है।
मूल नक्शे की मंजूरी में भी उड़ीं नियमों की धज्जियां
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया है कि 6 अप्रैल को जो मूल मानचित्र पास किया गया था, वह भी भवन उपविधि, 2011 (संशोधित-2024) के मानकों के अनुरूप नहीं था। स्वीकृत मानचित्र में स्टिल्ट पार्किंग और बेसमेंट के अनिवार्य प्रविधानों की अनदेखी की गई थी। यानी पहले नियमों को ताक पर रखकर नक्शा पास किया गया और बाद में मनचाहा निर्माण कराने के लिए फर्जी दस्तावेज अपलोड कर दिए गए।
निलंबन और विभागीय कार्रवाई की तैयारी
चर्चा है कि प्राधिकरण में ऐसे कई अन्य मामलों में भी नक्शे बदलने का खेल खेला गया है। उपाध्यक्ष डीपी सिंह ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तीन दिन के भीतर संतोषजनक और साक्ष्यों पर आधारित जवाब नहीं मिला, तो उत्तराखंड सरकारी सेवा नियमावली के तहत आरोपी अभियंता के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेज दी जाएगी।








