भारत 17 साल के सबसे सूखे मानसून की ओर बढ़ रहा है। 18 सितंबर तक जून से सितंबर के मानसून सीजन में देश में सामान्य से 15% कम बारिश हुई। मौसम विज्ञान विभाग ने सामान्य से 8% कम बारिश का अनुमान जताया था। बारिश की कमी बरकरार रही, तो यह 2009 के बाद सबसे कमजोर मानसून होगा। तब सामान्य से 18% कम पानी गिरा था।
देशभर के 218 जिलों में सूखे जैसे हालात
पंजाब में 39, हरियाणा में 22% कम बारिश
| राज्य | बारिश में कमी |
|---|---|
| मेघालय | 59% |
| आंध्र प्रदेश | 42% |
| पंजाब | 39% |
| बिहार | 36% |
| कर्नाटक | 30% |
| केरल | 28% |
| असम | 25% |
| तमिलनाडु | 23% |
| राजस्थान | 22% |
| हरियाणा | 22% |
| तेलंगाना | 20% |
इधर, दिल्ली में आठ फीसदी अधिक बारिश
देशभर के 802 में से 218 जिलों में जहां सूखे जैसी स्थिति है, वहीं दिल्ली में इस बार सामान्य से 8% अधिक बारिश हुई। इस बार 562.7 मिमी बारिश हुई। यहां औसतन 522.7 मिमी बारिश होती है। उत्तराखंड में 4 फीसदी अधिक बारिश हुई है।
हिमाचल प्रदेश में सामान्य से 9% कम और पूरे यूपी में 4% कम बारिश हुई। हालांकि गाजियाबाद में 59%, देवरिया में 73%, शामली में 68%, कानपुर देहात में 64% कम पानी गिरा।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, 178 प्रमुख जलाशयों में क्षमता का 70.66% ही पानी है। कमजोर मानसून का कारण सुपरसाइज्ड अल नीनो का मजबूत होना माना जा रहा है। इसका खतरा भारत-चीन समेत पूरे एशिया पर मंडरा रहा है। प्रशांत महासागर का पानी असामान्य रूप से गर्म हो रहा है, जिससे यह अल नीनो बेहद मजबूत हो सकता है। इससे सूखे की स्थिति हो सकती है। खाद्य संकट भी हो सकता है।






