दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव प्रक्रिया के दौरान कथित गुंडागर्दी और अदालती आदेशों के उल्लंघन की घटनाओं पर गुरुवार को कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि उसे संतुष्टि नहीं हुई कि इस तरह का आचरण दोबारा नहीं होगा, तो वह चुनावों को पूरी तरह रद्द कर सकती है।
पीठ ने दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन और कानून लागू करने वाली एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा, ‘दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन और कानून लागू करने वाली एजेंसियां क्या कर रही हैं?’ अदालत ने कहा कि किसी प्रशासक के लिए यह कहकर जिम्मेदारी से बचना आसान है कि कोई तीसरा पक्ष चुनाव नहीं होने दे रहा है। पीठ ने सवाल किया, ‘आप उन्हें रोक क्यों नहीं सकते?’ अदालत ने डूसू चुनाव कराने के तरीके पर भी चिंता जताई।चुनाव प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे वाहनों की तस्वीरों का हवाला देते हुए पीठ ने कहा कि उन कारों पर पंजीकरण नंबर प्लेट नहीं थीं। अदालत ने अधिकारियों के इस रुख पर भी सवाल उठाया कि इसमें शामिल लोग बाहरी हैं और उनकी पहचान नहीं हो पाई है। पीठ ने कहा कि कथित तौर पर वाहन दिल्ली की सड़कों पर बिना पंजीकरण नंबर प्लेट के चल रहे थे। अदालत ने पूछा कि यदि संबंधित लोगों ने उसके निर्देशों का उल्लंघन किया है, तो उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव के संबंध में अदालत में पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ने कहा कि अधिकारी शुक्रवार सुबह 10:30 बजे अदालत में पेश होकर यह साबित करेंगे कि याचिकाकर्ता द्वारा उजागर की गई घटनाओं को छोड़कर, इस वर्ष के चुनाव पिछले चुनावों की तुलना में 85-90% बेहतर थे। उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि कार्रवाई की जाएगी।एएसजी और याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत मनचंदा ने अदालत में लाए गए एक घायल कानून के छात्र की पहचान पर भी विवाद किया। इसके बाद पीठ ने चेतावनी दी, ‘यह कोई तमाशा नहीं है। कृपया इन सब में शामिल न हों।’
एएसजी ने कहा कि एक शिक्षक पर कथित हमले में शामिल व्यक्ति की गिरफ्तारी के संबंध में आश्वासन दिया जाएगा, और यह भी जोड़ा कि संबंधित छात्र को लॉ सेंटर-I मामले में निष्कासित कर दिया गया था।
मनचंदा ने कहा कि उनका इंस्टाग्राम छात्रों और शिक्षकों के संदेशों से भरा पड़ा था, जिसमें चुनाव संबंधी घटनाओं के दौरान बंदूकें लहराए जाने का आरोप लगाया गया था। उन्होंने कहा कि तस्वीरें वास्तविक थीं और इसीलिए उन्होंने अदालत का रुख किया था। इस दावे पर कि इस साल चुनाव बेहतर थे, उन्होंने कहा, ‘अगर यह बेहतर है, तो भगवान ही मालिक है।’






