चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत अगर किसी ने आपके वोट को लेकर फर्जी आपत्ति दर्ज कराई है तो आप उसके खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी करा सकते हैं। आयोग की ओर से इसका विकल्प खोला गया है।
इन धाराओं में दर्ज हो सकती है प्राथमिकी
- धारा 236 (कानूनी घोषणा में मिथ्या कथन) : आपत्ति दर्ज करते समय आवेदक की ओर से दी गई घोषणा जानबूझकर झूठी प्रस्तुत करने पर यह धारा लागू होती है। पूर्व में आईपीसी में ये धारा 199 थी।
- धारा 228 एवं 229 (झूठे साक्ष्य गढ़ना और प्रस्तुत करना) : किसी वैध मतदाता का नाम कटवाने के उद्देश्य से झूठे तथ्य, फर्जी पंचनामा या गलत साक्ष्य तैयार करने पर ये धारा लगती है जो कि आईपीसी में 192/193 थी।
- धारा 336 (जालसाजी): फर्जी प्रपत्र तैयार करने या धोखे से किसी के हस्ताक्षर, अंगूठे का दुरुपयोग करने पर ये धारा लगती है।
- धारा 340(2)(फर्जी दस्तावेज को असली के रूप में प्रयोग करना) : झूठे या मनगढ़ंत दस्तावेज को आधिकारिक रूप से आपत्ति के साथ पेश करने पर ये धारा लग सकती है।
- धारा 61(2)(आपराधिक षड्यंत्र) : यदि एक से अधिक व्यक्तियों या किसी समूह ने मिलकर सामूहिक रूप से वोट कटवाने की साजिश की हो तो ये धारा लग सकती है।
अगर किसी के वोट पर फर्जी आपत्ति दर्ज हुई है तो वह व्यक्तिगत तौर पर ऐसे आपत्तिकर्ता के खिलाफ प्रमाण के साथ पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज करा सकता है। यह मतदाता का व्यक्तिगत अधिकार है। इसमें विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी हो सकती है।
-डॉ. विजय कुमार जोगदंडे, अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखंड






