Scam: ED ने भी शुरू की कार्रवाई, समीर अग्रवाल व साथियों की करोड़ों की संपत्तियों को किया अटैच

Spread the love

लयूसीसी घोटाले में अब ईडी ने भी कार्रवाई शुरू कर दी है। उत्तराखंड और अन्य राज्यों में दर्ज प्राथमिकियों के आधार पर जांच करते हुए ईडी ने एलयूसीसी और सागा ग्रुप संचालक समीर गुप्ता व उसके साथियों की 30 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों को अटैच किया गया है। इनमें 1.35 करोड़ रुपये नकद, लग्जरी कारें, सोना और अचल संपत्तियां शामिल हैं।

ईडी की तलाशी में भारी मात्रा में घपले से जुड़े दस्तावेज और संपत्तियों का भी पता चला है। जांच एजेंसी ने 30 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के लिस्टेड शेयर, म्यूचुअल फंड, एलआईसी पॉलिसी और बैंक खातों में रकम फ्रीज की हैं।
इनके अलावा नौ गाड़ियां भी अटैच की गई हैं। आरोपियों के ठिकानों से 1.53 करोड़ रुपये कैश, लगभग 35 लाख रुपये मूल्य की विदेशी मुद्रा और 5.25 करोड़ रुपये के सोने-चांदी के आभूषण व बिस्किट बरामद हुए हैं। यूपी, एमपी, उत्तराखंड सहित कई राज्यों की पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर को आधार बनाते हुए ईडी ने इस मामले की जांच शुरू की थी।

जांच में सामने आया है कि समीर अग्रवाल के सागा ग्रुप ने एलयूसीसी (लोनी अर्बन मल्टी-स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी) और अन्य सहकारी समितियों के जरिए साल 2009 से जनता को ठगना शुरू किया था। आरोपियों ने आरडी, एफडी और मासिक आय योजनाओं में निवेश पर तीन से पांच साल के भीतर रकम दोगुनी-तिगुनी करने और कार जैसे महंगे गिफ्ट देने का झूठा लालच दिया। बिना किसी वास्तविक व्यापार के महज फर्जी बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर जनता से 10 हजार करोड़ रुपये से से अधिक की रकम ठग ली गई। शुरुआत में निवेशकों को भरोसा जीतने के लिए कुछ भुगतान किए गए, लेकिन बाद में समीर अग्रवाल और उसके साथियों ने अधिकांश रकम अपने निजी इस्तेमाल और एजेंटों को कमीशन बांटने में उड़ा दी।

और पढ़े  चमोली Landslide: दो श्रमिक टनल में अभी भी लापता, तलाश जारी, यूकेडी ने THDC के बाहर किया प्रदर्शन
सीबीआई भी कर रही है विवेचना
उत्तराखंड में दर्ज मामलों के आधार पर सीबीआई ने भी मामले की जांच शुरू की है। बड्स एक्ट के तहत कई संपत्तियों को अटैच किया जा चुका है। उत्तराखंड के लोगों से एलयूसीसी ने 800 करोड़ रुपये ठगे थे। इनमें से 400 करोड़ रुपये लौटाए जा चुके हैं। अब ईडी की जांच में और अधिक बड़ी बात सामने आई है। ईडी की जांच में 50 से अधिक शेल कंपनियों के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। जांच में पाया गया कि जनता से ज्यादातर पैसा नकद में इकट्ठा किया गया। इसके बाद रीजनल कैश चेस्ट के जरिए इसे शेल कंपनियों और हवाला चैनलों के माध्यम से देश और विदेश में अचल और चल संपत्तियां खरीदने में लगा दिया गया।

Spread the love
  • Related Posts

    रुड़की – गुरुकुल नारसन के टिकौला कलां गांव में नाले में मिला युवक का शव

    Spread the love

    Spread the loveरुड़की में गुरुकुल नारसन क्षेत्र के टिकौला कलां गांव में आज एक युवक का शव नाले में पड़ा मिला है। युवक की पहचान कपिल(40) पुत्र मेघवाल निवासी टिकौला कलां के…


    Spread the love

    हरिद्वार में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर मंथन: कार्यक्रम में पहुंचे सीएम धामी, शिवराज-रामदेव और संत समाज भी मौजूद

    Spread the love

    Spread the loveहरिद्वार में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ को लेकर संत समाज की ओर से कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। ज्वालापुर मार्ग स्थित श्रीजी वाटिका में आयोजित कार्यक्रम में…


    Spread the love