पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को मिली असीमित शक्तियों के खिलाफ सेना के अधीनस्थ रैंक अधिकारियों में असंतोष फैल गया है। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि गृह मंत्रालय को रावलपिंडी में सैन्य मुख्यालय के आसपास सुरक्षा के लिए सेना की तीन कंपनियां तैनात करनी पड़ी हैं। यह तैनाती अगले छह माह के लिए है। हालांकि, सरकार ने इसे राजनीतिक आक्रोश के कारण किसी तरह की संवेदनशील स्थिति से निपटने की कोशिश बताया है।
पाकिस्तान में हालिया संशोधनों के बाद फील्ड मार्शल मुनीर का कम से कम 2030 तक पद पर बने रहने का रास्ता साफ हो गया है। यही नहीं, उन्हें आजीवन कानूनी छूट तथा अभियोजन से सुरक्षा भी हासिल हो गई है। इससे सेनाओं के भीतर आंतरिक असंतोष को और हवा मिली है। दरअसल तीनों सेनाओं के कर्मियों को लग रहा है कि उनकी स्थिति बंधुआ मजदूर जैसी हो गई है।
सुरक्षा बलों पर हमले को बताया कारण
रावलपिंडी में सेना की यह ताजा तैनाती ऐसे समय में हुई है जब कुछ दिन पहले शहर के मॉल रोड पर सुरक्षा बलों पर एक हमला हुआ था, जिसमें एक संदिग्ध को मार गिराया गया। सरकारी हलकों में उसे इमरान खान की पार्टी पीटीआई से जोड़ने की कोशिशें हुईं, जिसे पार्टी ने सिरे से खारिज किया। रावलपिंडी में ही सेना का मुख्यालय भी स्थित है और अडियाला जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह एहतियात बरत रहा है।
पाकिस्तान की सेना के भीतर पहला विभाजन तब सुलगना शुरू हुआ जब पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ दुर्व्यवहार और राजनीतिक कार्रवाइयों को अंजाम दिया गया। हालात यह है कि पूर्व सैनिकों के संगठन भी स्थिति से बेहद खफा हैं। हालांकि वरिष्ठ अधिकारियों को विभिन्न भत्तों और विशेषाधिकारों के जरिये शांत रखने की कोशिश की जा रही है, लेकिन सैनिकों के परिवारों में भारी रोष है।
खौफजदा शरीफ सरकार : सरकार के ताजा फैसले के बाद स्थानीय मीडिया में इस तरह के सवाल भी उठाए जाने लगे हैं कि क्या शरीफ सरकार इमरान खान की पार्टी से इस कदर खौफजदा है कि उसे सेना की अतिरिक्त तैनाती जैसा कदम उठाना पड़ा है।






