इसी जांच में खुलासा हुआ कि फर्जी चैरिटेबल ट्रस्टों और बोगस डोनेशन के जरिए भारी मात्रा में धन विदेश भेजा जा रहा था। जिन फर्मों के खातों से यह रकम भेजी गई, उनमें से अधिकांश ने या तो अपना आयकर रिटर्न दाखिल ही नहीं किया था या फिर बेहद कम टर्नओवर दर्शाया था। फर्जी पतों पर चल रही इन कंपनियों ने सॉफ्टवेयर आयात, कंसल्टिंग और फ्रेट पेमेंट जैसे कारण बताकर विदेशी मुद्रा बाहर भेजी।
पेशेवरों की भूमिका संदिग्ध
इस पूरे खेल में फॉर्म 15 सीबी जारी करने वाले पेशेवरों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। नियमों के मुताबिक, किसी भी विदेशी भुगतान से पहले सीए को खातों की निष्पक्ष जांच और सत्यापन करना अनिवार्य होता है, लेकिन कुछ सीए ने बिना किसी उचित जांच के सर्टिफिकेट जारी कर दिए। इसी के तहत ताजगंज निवासी सीए द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों और विदेशी लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की आयकर विभाग गहनता से जांच कर रहा है। देश भर में 394 संदिग्ध इकाइयों जिनमें सीमावर्ती राज्यों की 117 इकाइयां शामिल हैं और 36 चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है।
इस पूरे खेल में फॉर्म 15 सीबी जारी करने वाले पेशेवरों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। नियमों के मुताबिक, किसी भी विदेशी भुगतान से पहले सीए को खातों की निष्पक्ष जांच और सत्यापन करना अनिवार्य होता है, लेकिन कुछ सीए ने बिना किसी उचित जांच के सर्टिफिकेट जारी कर दिए। इसी के तहत ताजगंज निवासी सीए द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों और विदेशी लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की आयकर विभाग गहनता से जांच कर रहा है। देश भर में 394 संदिग्ध इकाइयों जिनमें सीमावर्ती राज्यों की 117 इकाइयां शामिल हैं और 36 चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है।
सीबीडीटी की प्रवक्ता और आयकर आयुक्त (मीडिया एवं तकनीकी नीति) वी. रजिथा ने स्पष्ट किया कि फॉर्म 15CB/146 जारी करने वाले पेशेवरों को पूरी निष्ठा और पेशेवर सतर्कता से काम करना होगा।








