समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग पंचायत आरक्षण पर अपनी रिपोर्ट नवंबर-दिसंबर में ही दे पाएगा। उसके बाद प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए प्रशासक के रूप में प्रधान को छह माह का एक कार्यकाल और मिलने के पूरे आसार हैं।
आयोग के सूत्रों का कहना है कि अपनी रिपोर्ट उसे देने में न्यूनतम छह माह का समय लगेगा। आयोग को रिपोर्ट देने के लिए सभी 75 जिलों में जाना है। जबकि, 17 अगस्त तक 22 जिलों में ही भ्रमण हो पाया था। 18 मई को आयोग के सदस्य कन्नौज में और 19 मई को फर्रूखाबाद में रहेंगे। इस तरह से देखा जाए तो 50 से ज्यादा जिले अभी सर्वे के लिए रह गए हैं। आयोग से जुड़े लोगों का कहना है कि नवंबर-दिसंबर में ही सरकार को सौंपी जा सकेगी।
वर्ष 2022 में यूपी में जनवरी में विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लग गई थी। इस बार भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार कह चुके हैं कि यूपी में विधानसभा चुनाव अपने तय समय पर होंगे, क्योंकि चुनाव हमारे लिए सांविधानिक बाध्यता है। यानी, दिसंबर के बाद यूपी में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इन चुनावों की प्रक्रिया अप्रैल-मई तक निपटेगी। ऐसे में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों का जून-जुलाई से पहले होने मुमकिन नहीं लग रहा है।
मामला अदालत में विचाराधीन
ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है। हाईकोर्ट ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने संबंधी 25-26 मई के शासन के आदेश को असांविधानिक बताया है। इस मामले में सुनवाई की अगली तिथि 19 अगस्त है। इसमें समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग जहां अपने काम की स्टेटस रिपोर्ट रखेगा, वहीं राज्य सरकार की ओर से भी पक्ष रखा जाएगा।
ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है। हाईकोर्ट ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने संबंधी 25-26 मई के शासन के आदेश को असांविधानिक बताया है। इस मामले में सुनवाई की अगली तिथि 19 अगस्त है। इसमें समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग जहां अपने काम की स्टेटस रिपोर्ट रखेगा, वहीं राज्य सरकार की ओर से भी पक्ष रखा जाएगा।






