हरियाली तीज के पावन अवसर पर शनिवार को वृंदावन के आराध्य ठाकुर श्रीबांकेबिहारीजी महाराज अपने विशेष रत्नजड़ित स्वर्ण-रजत हिंडोले में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिए। साल में केवल एक बार होने वाले इस विशेष झूला दर्शन के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालु वृंदावन पहुंचे।
झूला विहार के बाद सुखसेज पर विश्राम करेंगे बिहारीजी
हरियाली तीज की परंपरा में ठाकुरजी के झूला विहार के साथ सुखसेज का विशेष महत्व है। झूला विहार के बाद ठाकुरजी के विश्राम के लिए स्वर्ण-रजत निर्मित शयनशैया सजाई जाएगी। पास में रजत आइना और श्रृंगार सामग्री से सुसज्जित सुहाग पिटारी रखी जाएगी। प्रियाजी और प्रियतम के मनोरंजन के लिए चांदी की शतरंज भी सजाई जाएगी। हरियाली तीज पर ठाकुरजी को दोनों समय हरे रंग की विशेष जड़ाऊ पोशाक और रत्नजड़ित स्वर्णाभूषण धारण कराए जाते हैं। इस अवसर पर मावा, मलाई, मक्खन, सादा, मीठा घेवर और फीकी, मीठी व केसरिया फैनी का विशेष भोग अर्पित किया जाता है। वर्ष में एक बार होने वाले इस अद्भुत झूला दर्शन को लेकर वृंदावन में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है। बुजुर्गों से लेकर युवा पीढ़ी तक ठाकुरजी के दर्शन के लिए घंटों कतार में खड़ी नजर आ रही है। आस्था, परंपरा और ऐतिहासिक स्वर्ण-रजत हिंडोले का यह अद्भुत संगम हरियाली तीज को वृंदावन के सबसे खास धार्मिक आयोजनों में शामिल करता है।
हरियाली तीज की परंपरा में ठाकुरजी के झूला विहार के साथ सुखसेज का विशेष महत्व है। झूला विहार के बाद ठाकुरजी के विश्राम के लिए स्वर्ण-रजत निर्मित शयनशैया सजाई जाएगी। पास में रजत आइना और श्रृंगार सामग्री से सुसज्जित सुहाग पिटारी रखी जाएगी। प्रियाजी और प्रियतम के मनोरंजन के लिए चांदी की शतरंज भी सजाई जाएगी। हरियाली तीज पर ठाकुरजी को दोनों समय हरे रंग की विशेष जड़ाऊ पोशाक और रत्नजड़ित स्वर्णाभूषण धारण कराए जाते हैं। इस अवसर पर मावा, मलाई, मक्खन, सादा, मीठा घेवर और फीकी, मीठी व केसरिया फैनी का विशेष भोग अर्पित किया जाता है। वर्ष में एक बार होने वाले इस अद्भुत झूला दर्शन को लेकर वृंदावन में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है। बुजुर्गों से लेकर युवा पीढ़ी तक ठाकुरजी के दर्शन के लिए घंटों कतार में खड़ी नजर आ रही है। आस्था, परंपरा और ऐतिहासिक स्वर्ण-रजत हिंडोले का यह अद्भुत संगम हरियाली तीज को वृंदावन के सबसे खास धार्मिक आयोजनों में शामिल करता है।





