रेलवे की पार्सल बोगी में फर्जी कागजात से माल दूसरे राज्यों में भेजकर जीएसटी चोरी के बड़े खेल का भंडाफोड़ हुआ है। ट्रांसपोर्टर के साथ जीएसटी अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आई है। 42 लाख के माल को 2 लाख रुपये का दर्शाकर पार्सल से भेजने की शासन में शिकायत पर विजिलेंस जांच हुई। आरोप की पुष्टि होने पर सोमवार को तीन जीएसटी अधिकारी और ट्रांसपोर्टर के खिलाफ विजिलेंस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई।
जूते, आयरन चेन, ब्रश और पेठा भेजा गया था
ज्योति नगर, इंद्रपुरम निवासी असलम कुरैशी ट्रांसपोर्टर है। 25 साल से यह कार्य कर रहा था। विवेचक ने ट्रेन से भेजे गए माल को 2 लाख रुपये का दिखाया जबकि रेलवे के प्रपत्र के अनुसार, माल में 300 बॉक्स जूते, 100 बोरी आयरन चेन थीं। एक बॉक्स में 40 जोड़ी जूते रखे हुए थे। प्रत्येक बोरी में 60 किलोग्राम आयरन चेन थीं। विजिलेंस ने माल की कीमत का आकलन किया। इसमें पता चला कि 42 से 45 लाख रुपये प्रति बोगी माल की कीमत थी। जीएसटी के मुताबिक, प्रति जोड़ी जूते की कीमत 250 रुपये पता चली। इस हिसाब से 300 बॉक्स माल 30 लाख रुपये का हो गया। 100 बोरी आयरन चेन की कीमत 12 लाख रुपये मानी गई। माल भाड़े के रूप में 90 हजार तक अदा किए गए।
पुलिस अधीक्षक विजिलेंस आलोक शर्मा ने बताया कि निरीक्षक अशोक कुमार ने जीएसटी के सहायक आयुक्त संदीप कुमार सिंह, वाणिज्य कर अधिकारी देवेश पांडेय, सतीश चंद्र और ट्रांसपोर्टर असलम कुरैशी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। इसमें धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा लगाई गई हैं। मामले में साक्ष्य संकलन कर कार्रवाई की जाएगी। आरोपियों की संपत्ति की भी जांच होगी।








