लाल सागर के बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए मिसाइल हमले में कम से कम छह लोगों की मौत की खबर सामने आई है। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने इस हमले के लिए ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को जिम्मेदार ठहराया है। बताया गया है कि हूतियों ने खाद्य सामग्री ले जा रहे छोटे मालवाहक जहाज ‘तिहामा’ पर तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हमले के बाद जहाज में आग लग गई।
दूसरे हमले में बचावकर्मियों को भी बनाया गया निशाना?
यमन के तटरक्षक बल ने बाद में पुष्टि की कि मृतकों में दो बचावकर्मी भी शामिल थे। इस तरह हमले में मरने वालों की संख्या छह हो गई। घटना को इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि दूसरा हमला उस समय हुआ, जब पहले हमले के बाद राहत और बचाव का काम चल रहा था। इससे जहाज पर मौजूद लोगों के साथ-साथ मदद के लिए पहुंचे बचावकर्मियों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य समुद्री आवाजाही के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
जहाज के मालिकाना हक को लेकर क्या सामने आया?
हमले के बाद जहाज के मालिकाना हक को लेकर शुरुआती जानकारी में भ्रम की स्थिति रही। यमनी अधिकारियों और समुद्री खुफिया समूह की शुरुआती जानकारी में कहा गया कि निशाना बनाया गया जहाज सऊदी अरब के स्वामित्व वाला था। हालांकि उपलब्ध समुद्री डेटा के मुताबिक तिहामा तंजानिया के झंडे के नीचे चल रहा था। जहाज के स्वामित्व से जुड़ी कंपनियां मिस्र और यमन में पंजीकृत बताई गई हैं। इससे जहाज की पहचान और उसके संचालन को लेकर शुरुआती दावों में अंतर सामने आया है।
सऊदी अरब के जजान में अरामको रिफाइनरी पर भी हुआ था हमला?
इस घटना के बीच सऊदी अरब के जजान में अरामको रिफाइनरी पर हूतियों के हमले का भी जिक्र सामने आया है। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने दावा किया था कि समूह ने ड्रोन के जरिए रिफाइनरी को निशाना बनाया। उनके मुताबिक यह कार्रवाई सऊदी अरब की ओर से सादा और हज्जाह प्रांतों में किए गए ड्रोन अभियानों के जवाब में की गई। सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय ने बाद में रिफाइनरी में आग लगने की पुष्टि की और बताया कि आग पर काबू पा लिया गया।
क्या लाल सागर में बढ़ रही है समुद्री सुरक्षा की चुनौती?
बाब अल-मंदेब में वाणिज्यिक जहाज पर दो बार हमला और बचावकर्मियों की मौत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बढ़ाती है। घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि संघर्ष का असर केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापारिक जहाज और राहत अभियान भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। इसी बीच पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के बीच घोषित मक्का संयुक्त रक्षा समझौते की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक जजान में हमले के बाद इस नए गठबंधन की ओर से कोई स्पष्ट सैन्य प्रतिक्रिया या धमकी सामने नहीं आई।






