भारत-नेपाल संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से सिंहदरबार में मुलाकात की। करीब एक घंटे चली इस बैठक में द्विपक्षीय संबंधों, आपसी सहयोग और विकास साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री बनने के बाद शाह की किसी विदेशी राजनयिक के साथ यह पहली आमने-सामने द्विपक्षीय बैठक है। दोनों देशों के बीच विकास सहयोग करीब सात दशक पुराना है और वर्तमान में स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, कनेक्टिविटी, व्यापार, कृषि तथा सांस्कृतिक विरासत समेत कई क्षेत्रों तक फैला हुआ है।
दोनों देशों के संबंधों को और गहरा करने की दिशा में हुई इस मुलाकात पर राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने भी अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने उच्चस्तरीय राजनयिक शुभकामनाओं के आदान-प्रदान और भारत-नेपाल के बीच मजबूत तथा बहुआयामी संबंधों को और विकसित करने की साझा प्रतिबद्धता पर जोर दिया। श्रीवास्तव ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘आज सुबह नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से मिलकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं। इसके साथ ही उन्हें प्रधानमंत्री मोदी की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं दीं। भारत-नेपाल की मजबूत और बहुआयामी साझेदारी को और गहरा करने पर सार्थक और उपयोगी बातचीत हुई।
यह बातचीत नई दिल्ली और काठमांडू, दोनों की उस निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है, जिसके तहत दोनों देश अपनी पुरानी दोस्ती को और मजबूत करने तथा आपसी हित से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की पहल को गति देने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। इस दौरान नवीन श्रीवास्तव ने सिंहदरबार में नेपाल की मंत्रिपरिषद के साथ भी मुलाकात की। भारतीय राजदूत और नेपाली प्रधानमंत्री के बीच हुई बैठक लगभग एक घंटे तक चली।
चीन से पहले भारत के राजदूत के साथ शाह ने की बैठक
यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि करीब चार महीने पहले पद संभालने के बाद से प्रधानमंत्री बालेन शाह ने पहली बार किसी विदेशी राजनयिक के साथ आमने-सामने द्विपक्षीय बातचीत की है। इससे पहले शाह ने राजदूतों के साथ अकेले में बैठक करने के बजाय समूह में बातचीत को प्राथमिकता देते हुए अपना रुख सख्त रखा था। श्रीवास्तव के साथ बैठक के बाद आज ही प्रधानमंत्री शाह चीन के राजदूत झांग माओमिंग के साथ अलग से बातचीत करेंगे। इसके बाद कल उनकी मुलाकात अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स स्कॉट अर्बोम के साथ होगी।
इन उच्चस्तरीय राजनयिक बैठकों में देरी क्यों हुई?
प्रधानमंत्री के करीबी सूत्रों ने बताया कि इन उच्चस्तरीय राजनयिक बैठकों की तैयारी कई सप्ताह पहले ही पूरी कर ली गई थी, लेकिन सुनसारी में हाल की घटनाओं के कारण इन बैठकों में थोड़ी देरी हुई।
नेपाल के विकास में भारत की साझेदारी कितनी पुरानी है?
नेपाल भारत के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण विकास साझेदारों में से एक है। नेपाल में आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भारत-नेपाल सहयोग की शुरुआत वर्ष 1951 में काठमांडू में गौचर हवाई अड्डे के निर्माण के साथ हुई थी। इस हवाई अड्डे का निर्माण वर्ष 1954 में पूरा हुआ था। कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली और अन्य क्षेत्रों में भारत सरकार की विभिन्न विकास परियोजनाओं के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए वर्ष 1954 में नेपाल में ‘इंडियन एड मिशन’ की स्थापना की गई थी। पिछले सात दशकों में भारत-नेपाल विकास सहयोग का दायरा लगातार बढ़ा है और इसमें काफी विविधता आई है। अब दोनों देशों के बीच सहयोग स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, अभिलेखागार, पुरातत्व, कनेक्टिविटी, व्यापार, कृषि, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और क्षमता निर्माण जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक फैल चुका है।
भारत की ओर से लागू की जाने वाली विकास परियोजनाएं नेपाल की जरूरतों और प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की जाती हैं। ये परियोजनाएं नेपाल के विभिन्न हिस्सों में फैली हुई हैं और देश के अलग-अलग क्षेत्रों की विकास संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में सहयोग करती हैं।







