भाजपा के वरिष्ठ नेता और संबलपुर से सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को नीट पेपर लीक मुद्दे पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से अपने इस्तीफे को लेकर चुप्पी तोड़ी। भुवनेश्वर की जीएम यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान जेन-जी को गुमराह करने की कोशिश की गई थी, जिसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी।
रायराखोल में एक अन्य कार्यक्रम के दौरान प्रधान ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बीजद कार्यकर्ताओं के विरोध और उन्हें ‘वापस जाओ’ कहने वाले नारों से वह परेशान नहीं हैं। हवाईअड्डे के पास बीजद की युवा और छात्र इकाइयों के कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए प्रधान ने कहा कि वह किसान के बेटे हैं। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें वापस जाने के लिए कहा जाएगा, तब भी वह वापस आएंगे।
प्रधान ने कहा कि नवीन पटनायक उन्हें ओडिशा की जनता के लिए शर्म की बात और खराब व्यक्ति भी बताते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजद अध्यक्ष युवाओं को उनके खिलाफ प्रदर्शन में शामिल कर रहे हैं। प्रधान ने सभा में सवाल किया कि क्या उन्होंने कभी ऐसा कोई काम किया है, जिससे ओडिशा की जनता को शर्मिंदा होना पड़े। इस पर सभा में मौजूद लोगों ने ‘नहीं’ में जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि हो सकता है कि वह राज्य के लिए सम्मान न ला पाए हों, लेकिन उन्होंने अपने काम से कभी ओडिशा के लोगों को शर्मिंदा नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि वह ऐसा कोई काम नहीं करेंगे, जिससे राज्य की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचे।
क्या प्रधान ने भगवान जगन्नाथ और देवी समलेश्वरी का आशीर्वाद बताया?
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वह 12 साल पहले भगवान जगन्नाथ और संबलपुर की अधिष्ठात्री देवी समलेश्वरी के आशीर्वाद से केंद्रीय मंत्री बने थे। नवीन पटनायक पर उनकी यह टिप्पणी जिस मंच से आई, वहां बीजद विधायक और ओडिशा विधानसभा के उपनेता प्रसन्न आचार्य भी मौजूद थे।






