ऑडिट में पोर्टल की पहचान और रिकॉर्ड प्रबंधन व्यवस्था में भी कई खामियां मिलीं। 12,283 ठेकेदारों का पंजीकरण महज 5,658 ईमेल आईडी से हुआ। 2.52 करोड़ रुपये के 38 टेंडरों में सभी बोलीदाता एक ही ईमेल आईडी से पंजीकृत थे। सीएजी ने इसे फर्जी प्रतिस्पर्धा यानी कवर बिडिंग की आशंका से जोड़ते हुए गंभीरता से लिया है। इसी तरह 16,582 ठेकेदार केवल 6,957 मोबाइल नंबरों से पंजीकृत मिले। 4.99 करोड़ रुपये के 411 टेंडरों में शामिल सभी बोलीदाता एक ही मोबाइल नंबर से जुड़े पाए गए। 66 ठेकेदार बिना अनिवार्य पैन नंबर के पंजीकृत थे, जिनमें 12 को टेंडर भी मिले। वहीं 146 ठेकेदारों के पैन नंबर आयकर विभाग के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते थे।
सीएजी की जांच में यह-यह मिला
- 7,181 टेंडरों में ठेकेदारों और अधिकारियों का एक ही आईपी पता
- 3,217.44 करोड़ रुपये के टेंडर जांच के घेरे में
- 2,519 टेंडरों में 8,654 बोलियां अधिकारियों वाले आईपी से अपलोड
- 7 सेवानिवृत्त अधिकारी पोर्टल पर सक्रिय मिले
- 12,283 ठेकेदार, लेकिन केवल 5,658 ईमेल आईडी
- 16,582 ठेकेदार, लेकिन केवल 6,957 मोबाइल नंबर
- 66 ठेकेदार बिना पैन के पंजीकृत
- 1.01 लाख करोड़ के टेंडरों में केवल 3.47% का अंतिम रिकॉर्ड उपलब्ध






