सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश द्वारा प्रतीक रिसॉर्ट्स एंड बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े मामले में पारित अंतरिम आदेशों पर गंभीर टिप्पणी करते हुए न्यायिक औचित्य और निष्पक्षता के सिद्धांतों पर जोर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन मूल याचिकाओं पर सुनवाई चल रही थी, वे अलग-अलग मुद्दों से संबंधित थीं, लेकिन अंतरिम आदेशों के माध्यम से मामले का दायरा काफी बढ़ा दिया गया। अदालत ने माना कि ऐसा संभवतः सद्भावना से किया गया हो, लेकिन असंबंधित याचिकाओं में इस प्रकार का विस्तार न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। पीठ ने सुझाव दिया कि यदि न्यायाधीश को यह मामला व्यापक जनहित का प्रतीत होता था, तो उसे हाईकोर्ट की जनहित याचिका समिति के समक्ष भेजा जा सकता था अथवा आवश्यक कार्रवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश को संदर्भित किया जा सकता था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह देखते हुए कि पेड़ों की कटाई पर रोक सहित हाईकोर्ट के कुछ अंतरिम आदेश और आश्वासन पहले से प्रभावी हैं, फिलहाल उन आदेशों में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि मामले के सभी कानूनी पहलुओं पर निर्णय संबंधित सक्षम पीठ करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश की प्रति उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजने का निर्देश दिया है, ताकि आपराधिक याचिका को उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जा सके तथा आवश्यकता होने पर जनहित याचिका प्रारंभ करने के संबंध में उचित निर्णय लिया जा सके।






