पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक नए चरण में पहुंचता दिख रहा है। सऊदी अरब के सार्वजनिक रूप से ईरान समर्थित गुटों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में शामिल होने और कूटनीतिक प्रयासों के फिर ठप पड़ने से क्षेत्र में हालात एक बार फिर गंभीर हो गए हैं। पिछले 24 घंटों में दोनों पक्षों की सैन्य गतिविधियों ने व्यापक संघर्ष की आशंकाओं को बढ़ा दिया है।
ईरान पर अमेरिका का बड़ा हमला, मिसाइल हमले के जवाब में दागे बम
अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर जोरदार हवाई हमले किए हैं। यह कार्रवाई जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर ईरान द्वारा दागे गए मिसाइल हमले के जवाब में की गई है। अमेरिकी सेना के मुताबिक, दो घंटे तक चले इस ऑपरेशन में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांड सेंटरों, मिसाइल और ड्रोन ठिकानों को निशाना बनाया गया है। ईरान के केशम द्वीप और खुजेस्तान प्रांत में जोरदार धमाकों की खबर है।
इस हमले के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बहुत बढ़ गया है। समुद्र में दो प्राकृतिक गैस जहाजों पर भी ड्रोन से हमले हुए हैं, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। इसके अलावा सऊदी अरब के तेल ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है। क्षेत्रीय देश दोनों देशों के बीच शांति बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल हालात काफी नाजुक बने हुए हैं।
ट्रंप ने फिर दी ईरान को धमकी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी देते हुए कहा कि अगर अमेरिकी सैनिकों पर हमला किया गया, तो अमेरिका पूरी ताकत से जवाब देगा। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा, हम उन्हें बुरी तरह जवाब देंगे। हम उन पर जोरदार हमला करेंगे। उन्हें कड़ी मार झेलनी पड़ेगी।
ईरान में हवाई हमलों के साथ-साथ मंगलवार देर रात अमेरिका और सऊदी अरब की सेनाओं ने इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों पर संयुक्त हवाई हमले भी किए। पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (पीएमएफ) ने बताया कि इन हमलों में कम से कम 20 लोगों की मौत हुई।
सेंटकॉम ने पुष्टि की कि इस संयुक्त अभियान में पूर्वी इराक में मौजूद हथियारों के गोदामों और सैन्य सामान रखने वाले ठिकानों को निशाना बनाया गया।
सेंटकॉम के अनुसार, यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि इससे पहले तीन दिनों में ईरान की इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने अमेरिकी सैनिकों और सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर 30 से अधिक ड्रोन हमले किए थे। इस संयुक्त सैन्य कार्रवाई से पहले सऊदी अरब ने कहा था कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने देश के पूर्वी प्रांत में तेल प्रतिष्ठानों की ओर भेजे गए कई ड्रोन मार गिराए थे। सऊदी अरब ने इन ड्रोन हमलों के लिए इराक में मौजूद ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों को जिम्मेदार ठहराया।
अमेरिका-सऊदी हमलों में इराक में आईआरजीसी के 4 सदस्य मारे गए: ईरानी मीडिया का दावा
अमेरिका और सऊदी अरब की संयुक्त सैन्य कार्रवाई में इराक के कई ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस हमले में ईरान की इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के कम से कम चार सदस्य मारे गए। ईरानी सरकारी मीडिया ने यह दावा किया है।
ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी ने बताया कि उत्तरी दियाला प्रांत में रातभर हुई बमबारी में आईआरजीसी के अली असगर अस्तानेह, अबोलफजल मोताकी, मोर्तेजा अकबरी और अमीर अब्बास दरहमफोरूश की मौत हो गई। रिपोर्ट में कहा गया कि ये चारों ईरान के मध्य हिस्से में स्थित काशान शहर के रहने वाले थे। हालांकि, उनकी सैन्य जिम्मेदारियों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।
अमेरिका ने ईरान में कई ठिकानों पर किए हवाई हमले
अमेरिका ने गुरुवार को ईरान के अंदर कई ठिकानों पर फिर से हवाई हमले शुरू कर दिए। एक्सिओस ने एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के हवाले से यह जानकारी दी। इससे पहले कुछ समय के लिए ये सैन्य अभियान रोका गया था। ये नए हवाई हमले उस घटना के बाद शुरू हुए हैं, जब इस सप्ताह की शुरुआत में ईरान ने जॉर्डन में मौजूद एक अमेरिकी सैन्य अड्डे की ओर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं।
अमेरिकी सेना की मध्य कमान (सेंटकॉम) ने बताया कि सभी मिसाइलों को रास्ते में ही रोक लिया गया और कोई भी अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी। सेंटकॉम ने इस हमले को पश्चिम एशिया में तैनात अमेरिकी ठिकानों पर ‘अचानक हमला करने की कोशिश’ बताया। उसने कहा कि ये मिसाइलें ईरान की जमीन से दागी गई थीं।
हालांकि, सेना ने उस सैन्य अड्डे का नाम नहीं बताया, लेकिन एक्सिओस समेत अमेरिकी मीडिया संस्थानों ने जानकारी दी कि निशाना जॉर्डन में स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डा था। यह पहली बार है, जब अमेरिका की ओर से ईरान पर हवाई हमले रोककर बातचीत का मौका देने के बाद, ईरान ने सीधे किसी अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है। इस तनाव पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान को इसका कड़ा जवाब मिलेगा।







